Book Title: Bhagavati Jod 06
Author(s): Tulsi Acharya, Mahapragna Acharya
Publisher: Jain Vishva Bharati

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Page 240
________________ २३ नव निकाय में संख्याता वर्ष नों सन्नी तिर्यंच ऊपजै तेहनों यंत्र (३) गना २०द्वार नी संख्या उपपात द्वार संघयण द्वार संठाण द्वार लेश्या द्वार दष्टिदार ज्ञान-अज्ञान द्वार योगद्वार | परिमाण द्वार जधन्य उत्कृष्ट अवगाहना द्वार जघन्य जघन्य | उत्कृष्ट | ओधिक नै औधिक | १० हजार वर्ष देसूण २पल्य ओधिक नैं जघन्य |10 हजार वर्ष | १० हजार वर्ष ओधिक नै उत्कृष्ट | देसूण २ पल्य | देसूण २ पल्य १२.३ ऊपजे संख्याता या असंख्याता ऊपजे आंगुलनों असंख हजार योजन भजना भजना भाग २ जघन्य अधिक १० हजार वर्ष | देसूण २पल्य जधन्य नै जघन्य १० हजार वर्ष १० हजार वर्ष जघन्य नै उत्कृष्ट देसूण २पल्य देशूण २पल्य १२.३ ऊपजै संख्याता या असंख्याता आंगुलनों असंख पृथक धनुष्य निश्या नियमा उपजे उत्कृष्ट नै ओधिक १० हजार वर्षदेसूण२पल्य उत्कृष्ट नै जघन्य १० हजार वर्ष १० हजार वर्ष उत्कृष्ट नै उत्कृष्ट | देसूण २ पत्य | देसूण २ पल्य १२.३ ऊपजै संख्याता या असंख्याता ऊपजे आंगुलनों असंख भाग हजार योजन भजना भजना २४ नव निकाय में मनुष्य युगलियो ऊपजै तेहनों यंत्र (४) गमा २० द्वार नी संख्या उपपातधार परिमाणद्वार संघयण द्वार अनगाहनाद्वार संठाणहार लेण्याद्वार । दृष्टिद्वार ज्ञान अज्ञान द्वार योग द्वार | उपयोग द्वारा जघन्य उत्कृष्ट जघन्य १ १.२.३ गाउ ओधिक नै ओधिक ओधिक जघन्य १० हजार वर्ष १० हजार वर्ष देसूण २ पल्य १० हजार वर्ष | संख्याता | १वज जपम नाराय ५सौधनुष्य जाझी समचउरंस महली निगा ओधिक नै उत्कृष्ट | देसूण २ पल्प | देसूण २पल्य देगूण २ गाउ ३गाउ सध्याता । १वज ऋषभ नाराय रागयरस गिध्या नियमा १२.३ संख्याता जघन्य नै ओधिक जघन्य नै जघन्य जघन्य नै उत्कृष्ट १० हजार वर्ष १० हजार वर्ष कोड पूर्व जामो कोड पूर्व जामो १० हजार वर्ष कोड पूर्व जाझो १वज । | ५ सी धनुष्य । घम नाराच जाझी सो धनुष्य जाझी १ समवतरस पहली गिल्या उत्कृष्ट नैं ओधिक संख्याता का ३गाउ ३माउ १० हजार वर्ष १० हजार वर्ष देसूण २पल्य देसूण २पल्या 10 हजार वर्ग देसूण २पल्य १२.३ ऊपजे ऋाण नाराय समचरम पहली मिथ्या नियमा ६ उत्कृष्ट नैं उत्कृष्ट २५ नव निकाय में संख्याता वर्ष नां सन्नी मनुष्य ऊपजै तेहनों यंत्र (५) गमा २०द्वार नी संख्या उपपात द्वार परिमाण द्वार संश्यण द्वार अवगाहना पार संठाणद्वार दृष्टिहार ज्ञान-अज्ञान द्वार योगद्वार जघन्य उत्कृष्ट जघन्य उत्कृष्ट जघन्य । १ २ ३ ओधिकनै ओधिक ओधिक नै जघन्य ओधिक नै उत्कृष्ट १० हजार वर्ष देसूण २ पल्य 110 हजार वर्ष १० हजार वर्ष देसूण २ पल्या देसूण २पल्य १२.३ ऊपजै संख्याता ऊपजै पृथक आगुल धनुष्य भजना भजना संख्याता जघन्य नै ओधिक जघन्य नै जघन्य ६ जघन्य नै उत्कृष्ट १० हजार वर्ष १० हजार वर्ष देसूण २पल्य देसूण २ पल्य १० हजार वर्ग देसूग २ पल्य १२३ ऊपजै पृथक आंगुल थक आंगुल भजना १२.३ ७ उत्कृष्ट नै ओधिक उत्कृष्ट नै जघन्य ६ उत्कृष्ट नै उत्कृष्ट १० हजार वर्ष १० हजार वर्ष | देसूण २ पल्य देसूण २पल्य ५० हजार दर्द देसूण २पल्य संख्याता ऊपजे ५सौ धनुष्य ऊपरी धनुष्य भजना २२६ भगवती-जोड (खण्ड-६) Jain Education Intemational For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org

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