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कोड
B 1.1
B 2.1
अर्हत् वचन वर्ष
B2.7
B 1.2
Nagarajan, K.S.: Philosopher Mathematician (L.C. Jain & Anupam Jain), Book, 1 (2), 64 Jaina Astronomy. (S.S. Lishk), Book, 1 (3), 83-84)
B 1.3
Amar, Gopilal Acharya
B1.4 Naimpally, S.A.: Mahāvīrācārya: A Critical Study ( In Hindi) (Anupam Jain & Suresh Chandra Agrawal (पुस्तक) 1(3). 85-86
B 2.8
1(1988-89 ) से वर्ष 14 (2002) में प्रकाशित
पुस्तक / लेख समीक्षाओं की वर्षानुसार सूची (74)
लेखक का नाम / पुस्तक / लेख का शीर्षक एवं प्रकाशन विवरण
जैन, सागरमल : महावीराचार्य एक समीक्षात्मक अध्ययन (अनुपम जैन एवं सुरेशचन्द्र अग्रवाल), (पुस्तक)
1 (1), 64.
B2.2
लिश्क, सज्जनसिंह : स्याद्वाद के सप्तभंग एवं आधुनिक गणित विज्ञान ( रमेशचन्द जैन), (लेख), 2 (1), 48 B 2.3 लिक, सज्जनसिंह पाई (19) का जैन मान और विदेशों में उसका प्रचार ( राधाचरण गुप्त ), (लेख),
:
2 (1), 48-49
B2.4 लिक, सज्जनसिंह : हेमराज, व्यक्तित्व एवं कृतित्व ( अनुपम जैन), (लेख), 2 (1), 49
B 2.5
B 2.6
शुक्ल, राममोहन जैन द्रव्यानुयोग का गणित, आधुनिक विज्ञान एवं आध्यात्मिक प्रगति (पारसमल अग्रवाल), (लेख), 2 (1), 47
जैन, हरीन्द्रभूषण गणितानुयोग (संकलन मुनि कन्हैयालाल 'कमल'), (पुस्तक) 2 (1), 51-55
"
Lishk, Sajjan Singh: Exact Sciences from the Jaina Sources, Vol. I: Basic Mathematics. (L.C. Jain), (Book), 2(1), 56-58
Hayashi, Takao: Exact Sciences from the Jaina Sources, Vol. II: Astronomy & Cosmology (L.C. Jain), (Book), 2(1), 59-60"
Dharmanand (Kshullak): Karma & Rebirth Pheonomenon of Jain Philosophy as worked out on Scientific Lines (R.M. Kasliwal), (Article) 2 (1), 61-62
B 2.9
शुक्ल, राममोहन जैन गणितीय साहित्य ( अनुपम जैन व सुरेशचन्द्र अग्रवाल), (लेख) 2 (2) 81-82 B2.10 शुक्ल, राममोहन जैन गणितज्ञ महावीराचार्य ( अनुपम जैन व सुरेशचन्द्र अग्रवाल), (लेख), 2 (2), 82-83 B2.11 शुक्ल, राममोहन आचार्य कुन्दकुन्द के साहित्य में विद्यमान गणितीय तथ्य ( अनुपम जैन), (लेख), 2 (2), 83 B2.12 शुक्ल, राममोहन आचार्य नेमिचन्द्र सिद्धान्त चक्रवर्ती की खगोल विद्या एवं गणित संबंधी मान्यताएँ - आधुनिक सन्दर्भ में (लक्ष्मीचन्द्र जैन) (लेख), 2 (2) 83-84
B2.13 शुक्ल, राममोहन माधवचन्द्र एवं उनकी षट्त्रिंशिका ( अनुपम जैन) (लेख), 2 (2), 84
Jain Education International
:
B2.14 Jain K.C. JambudvIpa Parisilan (Hindi) (Anupam Jain), (पुस्तक), 2 (3), 67-68
अर्हत् वचन, 15 (1-2), 2003
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