Book Title: Vardhaman Padmasinh Shreshthi Charitam
Author(s): Amarsagarsuri
Publisher: Shravak Hiralal Hansraj

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Page 119
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailasagarsur Gyanmandir वर्धमान ततः प्रजाते कृतमंगलावुभौ । कुटुंबयुक्तो चलितो च बांधवौ ॥ प्रमोदतस्तौ स्थलमार्गतो जुतं । चरित्रम रथाद्यनेकोचितवाहनस्थितौ ॥ ६६ ॥ एवं प्रयाणाय कृतप्रयत्नौ । कमेण पावाचलदुर्गमेतौ ॥ ॥११॥ एतौ युतौ स्वीयकुटुंबकेन । नतो कृतौचित्यकृती कृतज्ञौ ॥ ६७ ॥ क्रमाब्जयोयोजितहस्तयुग्मौ । स्वगोत्रदेव्याः किल कालिकायाः॥ विधाय पूजां विविधैर्विधान-स्ततः स्तवं चक्रतुरेकचित्तौ।६। युग्मं ॥अस्माकं कुलदेवी। सदैव रक्षापरा त्वमेवासि ॥ यावाच्यां कृपया ते । संकटजलराशिरुत्तीर्णः॥६॥ त्यार पछी प्रभाते करेल छे मंगल मुहूर्त जेमणे एवा ते बन्ने भाइओ ( वर्धमानशाह तथा पद्मसिंहशाह ) कुटुंब सहित हर्षथी स्थादिक अनेक उत्तम वाहनोमा बेशी जमीन मार्गथी जलदी चालता थया. ।। ६६ ।। एवी रीते प्रयाणने माटे करेल के यत्न जेणे एवा, पोताना कुटुंबथी युक्त एवा, करेला उपकारने जाणवावाला, क्रमें करीने पावागढमां आवेला, उचित काम करनारा, अने पोतानी गोत्रदेवी कालिकाना चरणकमलमा जोडेल छे वे हाथ जेणे एवा अने नमता एवा ते बन्ने भाइओ नाना प्रकारनी विधिओथी पूजा करीने एकचित्त थया थका ते देवीनी निश्च स्तुति करवा लाग्या. १६७।६८।। (हे कालिका 18/॥११५॥ देवी! ) तमें अमारी कुलदेवी छो, अने हमेशा ( अमारी ) रक्षा करवामां तमोज परायण छो, आपनी कृपाथीज अमो बन्ने 5] संकटना समुद्रने तरी गया छीये. ॥ ६९ ॥ HALCHALA SOCIALA For Private And Personal Use Only

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