Book Title: Vardhaman Padmasinh Shreshthi Charitam
Author(s): Amarsagarsuri
Publisher: Shravak Hiralal Hansraj

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Page 139
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagerul Gyanmandit चरित्रम. वर्धमान तत् श्रुत्वा जगमुस्तूर्ण-ममंदं मुदमुझदन् ॥ पितृपितृव्यसनक्ति-परः कीर्त्यजिलाषुकः ॥ ३३ ॥ प्रार्थयामास सूरीमान् । श्रीमत्कल्याणसागरान् ॥ चरित्ररचनायैष । एतयोर्जव्यवोधये ॥ ३४ ॥ ॥१३५॥ युग्मं ॥ सूरयोऽप्यथ संतुष्टा-स्तस्य वांछाप्रपूर्तये ॥ जगडोर्गुरुतातोरु-भक्तिं च प्रविलोक्य ते ॥३५॥ आदिशन्नमरसागरं कविं । तच्चरित्ररचनाय सादरं ।। स्वीयपट्टकवरोदयाचले । भास्वर द्युतिनरोरुभास्करं ॥ ३६ ॥ युग्मं ॥ ते सांभळीने कीर्तिना इच्छक एवा ते जगडुशाहे अत्यंत हर्ष धारण करतां थका पोताना पिता अने काकानी उत्तम भक्ति करवामां तत्पर थइ भव्य जीवोना बोधने अर्थे तेओर्नु चरित्र रचवा माटे श्रीमान् कल्याणसागरसूरीश्वरजीने प्रार्थना करी. ॥ ३॥ ३४ ॥ त्यारे ते जगडशाहनी गुरु तथा पिता प्रत्ये मनोहर भक्ति जोइने तेनी इच्छा संपूर्ण करवा माटे खुशी * थइ ते आचार्य महाराज श्रीकल्याणसागरमरिजीए पण पोताना पाटरूपी उत्तम उदयाचल पर्वतपर देदीप्यमान कांतिना समू हथी मनोहर सूर्यसरखा कवीश्वर श्री अमरसागरसूरीश्वरजीने तेश्रोनु (वर्धमानशाह तथा पासिंहशाहनु ) चरित्र रचवा माटे 18| आदर सहित हुकम कर्यो. ॥ ३५ ॥ ३६ ॥ CREACANCHLOCACANCESCA | ॥१३॥ For Private And Personal Use Only

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