Book Title: Pind Niryukti
Author(s): Manekyashekharsuri, Kanchanvijay
Publisher: Devchand Lalbhai Pustakoddhar Fund

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Page 298
________________ क्षमा रत्नीया बचूर्युपेता श्री पिण्ड निर्युक्तिः ॥१२९ ॥ Jain Education Inter गाथायाः प्रतीकम् सरसर सङ्घस्स व दिवसे सद्दाइएस साहू समणकडाहा कम्मं समणे माहणि किवणे सम्ममसम्मा किरिया सयमेवालोएउं सवलय घणतणु० aalsasiaकाओ सहस पट्ठा दिट्ठा साउं पज्जतं आयरेण सा उ अविसेसियं सागारी मंख छंदण गाथाडः पत्रम् ४८३ ८९ २७० ५२ २२४ ४५ २६९ ५२ ४४३ ८२ ४४० ८२ ५१८ गाथायाः प्रतीकम् साधारणं बहू सामत्थण रायसुए सामी चारभडा वा सालीओ अणहत्थ सालीघयगुलगोरस सालीमाइ अवडे सावग ज वीस मि० ९४ ९ साहम्मऽभिग्गणं साहुगुणकणं ३९ ४४ १० २१५ ४३ १२८ २७ २२१ ३१० सिइअवणण पडि० सिओ उसिणो साहारणो सिज्झतस्सुवया रं ५९ | सीउण्हखारखते ४४ गाथाडुः पत्रम् ५९४ १०७ १२१ २५ ३७१ ६९ १९८ ४० १८० ३७ १६१ ३२ १५५ ३२ १४९ ३० २९७ ५७ ४७३ ८६ ६५१ ११७ २५१ ४९ १३ ४ For Private & Personal Use Only गाथायाः प्रतीकम् सी उखारखते सीए दबस्स एगो सीवन्निसरिसमोयग ० सुभद्दग दिखाई सुके सुकं पडियं सुक्के सुकं पढमो सुक्केणऽवि जं छिक्कं सुकेण सरक्खेण सुकोल्लसरिसपाए सुचस्स अप्पमाणे सुन्नं व असइ कालो सुभगदुङभग्ग करा सुयअभिगमनाय गाथाडु: पत्रम् २२ ५ ६५२ ११८ ८१ १७ ५९९ १०८ ३९८ ७४ ५६७ १०२ २८ ७३ ५३३ ९६ ३९७ ७४ ५२५ ९५ ३३५ ६३ ५०२ ९२ ३१७ ६० गाथानामकारादि क्रमः । ॥१२९ ॥ www.jainelibrary.org

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