Book Title: Pind Niryukti
Author(s): Manekyashekharsuri, Kanchanvijay
Publisher: Devchand Lalbhai Pustakoddhar Fund

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Page 311
________________ १३९ परि०८ अवचरिगतान्यु १४२. रणानि । १४४ ३४ लोमपिण्डे ३५ विद्यापिण्डे ३६ मन्त्रपिण्डे ३७ चूर्णे ३८ पादलेपे ३९ मूलक, (प्रथम) , (द्वितीय) ४१ विवाहे HI४२ , गर्भाधाने द्रव्यैषणायां ४५ बालवदायके ४६ छर्दिते ४७ द्रव्यग्रासैषणायां occuWWWWW०००० सिंहकेशरमोदकगवेशकः सुव्रतसाधुः ४८२-४८३ धनदेवोदाहरणम् ४९५-४९६ पादलिप्सोदाहरणम् ४९८ चाणक्योदाहरणम् भा० ३५-३७ समितसूरयः ५०३-५०५ सुन्दयुदाहरणम् ५०६-५०७ धनदसोदाहरणम् ५०६-५०७ प्रथमम् ५०८ द्वितीयम् ५०९ द्वे पत्न्यौ ५१०-५११ वानरयूथोदाहरणम् ५१७-५१९ लम्पटसाधुसंघाटकोदाहरणम् ५७९ मधुबिन्दूदाहरणम् ६२८ मत्सस्य कल्पितोदाहरणम् ६३०-६३३ ॥ इति अवचूरिगतानि परिशिष्टानि समाप्तानि ॥ Coco CocoC SSCC00W occ १४४ १४५ १४५ ० १४५ १४६ १५८ १०४ ११३ ११३ ur9 . Jain Education in For Private Personel Use Only A ww.jainelibrary.org

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