Book Title: Painnay suttai Part 2
Author(s): Punyavijay, Amrutlal Bhojak
Publisher: Mahavir Jain Vidyalay
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२९८
'पइण्णयसुत्ताई भाग १-२' गंथाणं गाहाणं अणुक्कमो
गाहा
689
,,णिसण्णा सिद्धा ,,, सलिंगे , ,, सतरसविहसंजम, सद्दरूवरसगंधमागए , संपइ परिसत्था
साहंति सया वि हु ,, साहू पंचविहं जेसिं आजीवतो अप्पा जेसिं जहिं सुहप्पत्ती
" तु पमाएणं जेसु जायते कोधाती जेहिं सयं किर धणियं " हया मोहाई जो अणुभावो सुसमाए ,, अवरदक्खिणे रइकरो ,, अविणीयं विणएण ,, आरंभे वट्टइ जोइस-विजयसत्थाण जोइसिएसु सुरत्तं जोई-विजयसस्थाण जो उत्तरअंजणगो , उ प्पमायदोसेणं , एवं पब्वइओ जोएसु किलायंता जो कओ लोभदोसेण ,, काले सज्झाओ जो किर सम्मद्दिष्टी , कुंचगावराहे ,, कोइ कओ कोवो " , , माणो "" , लोभो ,, ,, मए विहिओ ,, को वि य पाणिगणो , गारवेण मत्तो जोग्गं पायच्छित्तं . जो चडइ हु सित्तुंजे , चत्वारि कसाए
गाईको | गाहा
गाईको 2444 , जत्तो वा जाओ
३००१ 2442 ,, जत्थ विजती भावो
१६२९ 2646 B , जस्स उ विक्खभो 750 , जहवायं न कुणइ
955 2430 " जहियं सो तत्तो
1814 2641 , नाई सयसहस्साई
२३५० 1045 ,, जारिसओ कालो
39 २०५५ जाहे आवजह
३९९० १८०७ , जोगओ य परिणामओ
८५७ ,, जो भूमिसएसो
३०२६ १९८० जोणिमुहनिगच्छंतेणं 2615 जोणिसयसहस्सेसु य 2608 जोणीमुहनिप्फिडिओ
४२९ ३६०५ जो तिण्णि जीवसहिया
६२२ २१९. , तिपयपत्तसत्तो
802 ,, तिहिं पएहिं धम्म
११७७ ८४० , दक्खिणअंजणगो
२१७७ 276 , दसविहं पि धम्म
४७५० 465,2157 , दीणो परिभूओ 1955 दोन्नि जीवसहिया
६२१ २१८१ , निच्छएण गिण्हइ
११९० २९२२ , निवडते सत्ते
264 ४३३७ , पडिमं चेहरे
३०८० ७८७ , परदोसे गिण्डइ
1151 2748 , परिभवइ मणूसो
४९२ 2194 जो पंच इंदियाई
६२४ पृ० ७७ टि० , पुण अत्थं अवहरह २७४२, 1464 ११७६ ,,, तवं च तप्पा
३०८१ 2245 ,, ,, दंसणमइलो २३८५, पृ० ८७ टि. 2246 " , सणसुद्धो
२३८६ 2248
२३८४ 2249 ,, बलेण मत्तो
पृ०८७ टि० , पुव्वदक्खिणे रइकरगो
२१८७ २३८३ भत्तपरिणाए...। सो चेव जहा 1836
भत्तपरिन्नाए...। , बाल- २८२० , मम धणे ममत्तो
2236 ६२३ । ,, मे दुक्खावियओ
2250
2254
" , पत्तब्भूओ
2727
३०९२
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