Book Title: Apbhramsa Vyakaran evam Chand Alankar Abhyas Uttar Pustak
Author(s): Kamalchand Sogani, Shakuntala Jain
Publisher: Apbhramsa Sahitya Academy

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Page 21
________________ पाठ 15-परमात्मप्रकाश परमप्पु = परम+अप्पु (परम आत्मा) नियम 4- लोप-विधान सन्धिः (क) स्वर के बाद स्वर होने पर पूर्व स्वर का लोप विकल्प से हो जाता है। परमाणंद = परम+आणंद (परम आनंद) नियम 1- समान स्वर सन्धिः (क) अ+आ = आ। . जीवाजीव = जीव+अजीव (जीव और अजीव) नियम 1- समान स्वर सन्धिः (क) अ+अ = आ। अणिंदिउ = अण+इंदिउ (इन्द्रियरहित) नियम 4- लोप-विधान सन्धिः (क) स्वर के बाद स्वर होने पर पूर्व स्वर का लोप विकल्प से हो जाता है। पाठ 16-पाहुडदोहा अप्पायत्तउ = अप्प+आयत्तउ (स्वयं के अधीन) नियम 1- समान स्वर सन्धिः (क) अ+आ = आ। कम्मायत्तउ = कम्म+आयत्तउ (कर्मों के अधीन) नियम 1- समान स्वर सन्धिः (क) अ+आ = आ। सुमिट्ठाहार = सुमिट्ठ+आहार (सुमधुर आहार) नियम 1- समान स्वर सन्धिः (क) अ+आ = आ। पाठ 17-सावयधम्मदोहा खेत्तियई = खेत्त+इयई (खेत में) ___नियम 4- लोप-विधान सन्धिः (क) स्वर के बाद स्वर होने पर पूर्व स्वर का लोप विकल्प से हो जाता है। दोसड = दोस+अड (दूषण) नियम 4- लोप-विधान सन्धिः (क) स्वर के बाद स्वर होने पर पूर्व स्वर का लोप विकल्प से हो जाता है। 10 अपभ्रंश-व्याकरण एवं छंद-अलंकार अभ्यास उत्तर पुस्तक Jain Education International For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org

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