Book Title: Apbhramsa Vyakaran evam Chand Alankar Abhyas Uttar Pustak
Author(s): Kamalchand Sogani, Shakuntala Jain
Publisher: Apbhramsa Sahitya Academy

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Page 20
________________ धाइवि = धाअ+इवि (दौड़कर) नियम 4- लोप-विधान सन्धिः (क) स्वर के बाद स्वर होने पर पूर्व स्वर का लोप विकल्प से हो जाता है। जिणायमु = जिण+आयमु (जिनागम) __ नियम 1- समान स्वर सन्धिः (क) अ+आ = आ। पयडियसुवाउ = पयडिय-सुव+आउ (पुत्र की आयु, प्रकट की गयी) नियम 1- समान स्वर सन्धिः (क) अ+आ = आ। पाठ 14-हेमचन्द्र के दोहे असुलहमेच्छण = असुलहं+एच्छण (असुलभ लक्ष्य) नियम 6- यदि पद के अन्तिम 'म्' के पश्चात स्वर आवे तो उसका विकल्प से अनुस्वार होता है। (प्राकृत-व्याकरण पृ.4) कुडुल्ली = कुडि+उल्ली (कुटिया) नियम 4- लोप-विधान सन्धिः (क) स्वर के बाद स्वर होने पर पूर्व स्वर का लोप विकल्प से हो जाता है। जिब्भिन्दिउ = जिब्भ+इन्दिउ (रसना इन्द्रिय) नियम 4- लोप-विधान सन्धिः (क) स्वर के बाद स्वर होने पर पूर्व स्वर का लोप विकल्प से हो जाता है। जैप्पि = जि+एप्पि (जीतकर) नियम 4- लोप-विधान सन्धिः (क) स्वर के बाद स्वर होने पर पूर्व स्वर का लोप विकल्प से हो जाता है। भुञ्जणहं = भुज+अणहं (भोगने के लिए) नियम 4- लोप-विधान सन्धिः (क) स्वर के बाद स्वर होने पर पूर्व स्वर का लोप विकल्प से हो जाता है। अपभ्रंश-व्याकरण एवं छंद-अलंकार अभ्यास उत्तर पुस्तक 9 Jain Education International For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org

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