Book Title: Apbhramsa Vyakaran evam Chand Alankar Abhyas Uttar Pustak
Author(s): Kamalchand Sogani, Shakuntala Jain
Publisher: Apbhramsa Sahitya Academy

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Page 30
________________ वृक्ष चंदणतरु (चंदन के नियम 2 को) छट्ठी विभत्ति तप्पुरिस समास (षष्ठी तत्पुरुष समास ) लोहियसुक्क (लाल और सफेद) नियम 1 - दंद समास (द्वन्द्व समास ) रसणफंसणरसदड्ढउ (रसना और स्पर्शन इन्द्रियों के रस से सताया हुआ) नियम 2- तइया विभत्ति तप्पुरिस समास (तृतीया तत्पुरुष समास ) Jain Education International पाठ 7-महापुराण सीलसायरा (शील के सागर) नियम 2- छट्ठीं विभत्ति तप्पुरिस समास (षष्ठी तत्पुरुष समास ) दुरियणासिणा (पाप के नाशक) नियम 2- छट्ठी विभत्ति तप्पुरिस समास (षष्ठी तत्पुरुष समास ) कुलविहसणं (कुल की शोभा ) नियम 2- छट्ठी विभत्ति तप्पुरिस समास (षष्ठी तत्पुरुष समास ) केसरिकेसरु (सिंह के बाल को) नियम 2- छट्ठी विभत्ति तप्पुरिस समास (षष्ठी तत्पुरुष समास ) वरसइंथणय (श्रेष्ठ सती के वक्षस्थल को ) नियम 2- छट्ठी विभत्ति तप्पुरिस समास (षष्ठी तत्पुरुष समास ) कालाणलु (कालरूपी अग्नि) नियम 2.1 - कम्मधारय समास ( कर्मधारय समास ) • परमुण्णइ (परम उन्नतिं) . नियम 2.1 - कम्मधारय समास ( कर्मधारय समास ) सिहिसिहहिं (अग्नि की ज्वाला में) नियम 2 छट्ठी विभत्ति तप्पुरिस समास (षष्ठी तत्पुरुष समास ) रणगणि (रण के आंगन में) नियम 2छट्ठी विभत्ति तप्पुरिस समास (षष्ठी तत्पुरुष समास ) रक्खाकंखड़ (रक्षा की इच्छा से) नियम 2 छट्ठी विभत्ति तप्पुरिस समास (षष्ठी तत्पुरुष समास ) अपभ्रंश-व्याकरण एवं छंद - अलंकार अभ्यास उत्तर पुस्तक For Personal & Private Use Only 19 www.jainelibrary.org


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