Book Title: Apbhramsa Vyakaran evam Chand Alankar Abhyas Uttar Pustak
Author(s): Kamalchand Sogani, Shakuntala Jain
Publisher: Apbhramsa Sahitya Academy

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Page 26
________________ बहु-अंसु-जलोल्लिय (विपुल, आंसू रूपी, जल से, भरे हुए) नियम 2- तइया विभत्ति तप्पुरिस समास (तृतीया तत्पुरुष समास) भयाउरए (भय से आतुर) नियम 2- तइया विभत्ति तप्पुरिस समास (तृतीया तत्पुरुष समास) पाठ 4-पउमचरिउ आसा-पोट्टलु (आशाओं की पोटली) - नियम 2- छट्ठी विभत्ति तप्पुरिस समास (षष्ठी तत्पुरुष समास) महि-मण्डलु (पृथ्वीमण्डल) नियम 2- छट्ठी विभत्ति तप्पुरिस समास (षष्ठी तत्पुरुष समास) . जरढ-मयलञ्छणु (क्षीण चन्द्रमा) . नियम 2.1- कम्मधारय समास (कर्मधारय समास) वरिसिय-घणु (बरसा हुआ बादल) नियम 2.1- कम्मधारय समास (कर्मधारय समास) अमर-वहूहिं (देवताओं की स्त्रियों द्वारा) ... नियम 2- छट्ठी विभत्ति तप्पुरिस समास (षष्ठी तत्पुरुष समास) भमरावलिहि (भँवरों की पंक्तियों द्वारा) नियम 2- छट्ठी विभत्ति तप्पुरिस समास (षष्ठी तत्पुरुष समास) दस-सिरु (दससिर) नियम 2.2- दिगु समास ( द्विगु समास) दस-सेहरु (दसशिखा) नियम 2.2- दिगु समास ( द्विगु समास) दस-मउडउ (दसमुकुट) - नियम 2.2- दिगु समास ( द्विगु समास) मुच्छा-विहलु (मूर्छा से व्याकुल) नियम 2- तइया विभत्ति तप्पुरिस समास (तृतीया तत्पुरुष समास) भाइ-विओएं (भाई के वियोग से) . नियम 2- छट्ठी विभत्ति तप्पुरिस समास (षष्ठी तत्पुरुष समास) अपभ्रंश-व्याकरण एवं छंद-अलंकार अभ्यास उत्तर पुस्तक 15 .. Jain Education International For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org

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