Book Title: Apbhramsa Vyakaran evam Chand Alankar Abhyas Uttar Pustak
Author(s): Kamalchand Sogani, Shakuntala Jain
Publisher: Apbhramsa Sahitya Academy

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Page 25
________________ तव-वाएं (तप की बात से) नियम 2- छठ्ठी विभत्ति तप्पुरिस समास (षष्ठी तत्पुरुष समास) वर-उज्जाणइं (श्रेष्ठ उद्यानों को) नियम 2.1- कम्मधारय समास (कर्मधारय समास) तव-चरणहो (तप के आचरण का) नियम 2- छट्ठी विभत्ति तप्पुरिस समास (षष्ठी तत्पुरुष समास) चउ-कसाय-रिउ (चारों कषायरूपी शत्रु) नियम 2.1- कम्मधारय समास (कर्मधारय समास) .. अत्तावणु (शरीर का तपन) नियम 2- छट्ठी विभत्ति तप्पुरिस समास (षष्ठी तत्पुरुष समास) तव-चरणु (तप के आचरण) नियम 2- छुट्टी विभत्ति तप्पुरिस समास (षष्ठी तत्पुरुष समास) दय-धम्मु (दया एवं धर्म) नियम 1- दंद समास (द्वन्द्व समास) जर-मरण (जरा-मरण) नियम 1- दंद समास (द्वन्द्व समास) पाठ 3-पउमचरिउ . गुरू-वेसु (शिक्षक के रूप को) __ नियम 2- छट्ठी विभत्ति तप्पुरिस समास (षष्ठी तत्पुरुष समास) सुन्दर-सराई (सुन्दर स्वरों को) नियम 2.1- कम्मधारय समास (कर्मधारय समास) अक्खर-णिहाणु (अक्षरों का भण्डार) नियम 2- छट्ठी विभत्ति तप्पुरिस समास (षष्ठी तत्पुरुष समास) गयणङ्गणे (आकाश के आंगन में) नियम 2- छट्ठी विभत्ति तप्पुरिस समास (षष्ठी तत्पुरुष समास) जगणाहहो (जग का नाथ) नियम 2- छट्टी विभत्ति तप्पुरिस समास (षष्ठी तत्पुरुष समास) अपभ्रंश-व्याकरण एवं छंद-अलंकार अभ्यास उत्तर पुस्तक 14 Jain Education International For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org

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