Book Title: Apbhramsa Vyakaran evam Chand Alankar Abhyas Uttar Pustak
Author(s): Kamalchand Sogani, Shakuntala Jain
Publisher: Apbhramsa Sahitya Academy

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Page 23
________________ समास प्रयोग के उदाहरण (अपभ्रंश काव्य सौरभ) पाठ 1-पउमचरिउ कोसलणन्दणेण (कोसल नगर के राजपुत्र द्वारा) . नियम 2- छठ्ठी विभत्ति तप्पुरिस समास (षष्ठी तत्पुरुष समास). आसाढट्ठमिहिं (आसाढ की अष्टमी के दिन) नियम 2- छट्ठी विभत्ति तप्पुरिस समास (षष्ठी तत्पुरुष समास) सुर-समर-सहासेहिं (देवताओं के साथ हजारों युद्धों में) नियम 2- तइया विभत्ति तप्पुरिस समास (तृतीया तत्पुरुष समास) रहसुच्छलिय-गत्तु (हर्ष से पुलकित शरीरवाला) नियम 2- तइया विभत्ति तप्पुरिस समास (तृतीया तत्पुरुष समास) जिण-वयणु (जिण का वचन) नियम 2- छट्ठी विभत्ति तप्पुरिस समास (षष्ठी तत्पुरुष समास) . सीस-वलग्ग (सिर पर चढ़ा हुआ) नियम 2- सत्तमी विभत्ति तप्पुरिस समास (सप्तमी तत्पुरुष समास) सन्धि-वन्ध (हड्डियों के जोड़ो के बन्धन) नियम 2- छट्ठी विभत्ति तप्पुरिस समास (षष्ठी तत्पुरुष समास) गिरि-णइ-पवाह (पर्वतीय नदी के समान प्रवाह को) नियम 2- छट्ठी विभत्ति तप्पुरिस समास (षष्ठी तत्पुरुष समास) राम-वप्पु (राम के पिता) नियम 2- छट्ठी विभत्ति तप्पुरिस समास (षष्ठी तत्पुरुष समास) मेरु-सरिसु (मेरु पर्वत के समान) नियम 2- छट्ठी विभत्ति तप्पुरिस समास (षष्ठी तत्पुरुष समास) 12 अपभ्रंश-व्याकरण एवं छंद-अलंकार अभ्यास उत्तर पुस्तक Jain Education International For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org

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