Book Title: Kappasuttam Vhas Vises Chunni Sahiyam Part 03
Author(s): Bhadrabahuswami, Sanghdasgani Kshamashraman, 
Publisher: Shubhabhilasha Trust

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Page 219
________________ १०६२ चकमणाए संतो चकमणे पासवणे चंकमणे पुण भइयं चंकम्मियं ठियं मोडियं च चंगोड णउलदायण चंदगुत्तपत्त चंदुज्जोवे को दोस चंपा अणंगसेो चकण्णं होज्ज रहं चउगुरुका छग्गुरुका चउगुरुग छ च्च लहु गुरु चउगुरुग छच्च लहु गुरु चउण्हं उवरि वसंती चउत्थपदं तु विदिन्नं चउथो पुण जसकित्तिं चउदसविहो पुण भवे चउपादा तेगिच्छा मूलं पंचमूलं चउरंगवग्गुरा परिवुडो वि चउरो गुरुगा लगा चउरो चउगुरु अहवा चउरो चउत्थभत्ते चउरो य अणुग्घाया चउरो य दिव्विया भागा चउरो य हुंति भंगा चउरो लहुगा गुरुगा चउरो लहुगा गुरुगा चउरो लहुगा गुरुगा चउरो लहुगा गुरुगा चउरो लहुगा गुरुगा १३१९ ४४४३ ४४५७ २५९८ ५११६ ३२७६ २८६० ५२२५ २०८८ २५२१ २४७८ ३८९८ २१०७ २५८६ ४६५७ १११२ १९३७ ३४२९ ३८२८ ३९८२ ३६८३ २७०० ५३६० ३६८६ २८३३ ६२२३ १९९१ १९९३ १९९५ १९९७ २५३८ चउरो विसेसिया वा चउहालंकारविउव्विए भासगाहाणं अकारादिकमो उहिँ ठिता छहिँ अठिता चड्डग सराव कंसिय चतुठाणठिओ कप्पो चतुपाया तेगिच्छा चत्तारि अहाकडए चत्तारि छ च्च लहु गुरु चत्तारि छच्च लहु गुरु चत्तारि नवग जाणंतगम्मि चत्तारिय उक्कोसा चत्तारि य उग्घाता चत्तारि य उग्घाया चत्तारि य उग्घाया चत्तारि समोर चम्मं चेवाहिकयं चम्मकरग सत्थादी चम्मतिगं पट्टदुगं चम्मम्मि सलोमम्मिं चम्माइलोहगहणं चरणकरणप्पही चरणकरणसंपन्ना चरणोदासीणे पुण चरमे पढमे बिइए चरित्तट्ठ देसे दुविधा चरिमे परिताविय पेज्ज चरिमे वि होइ जयणा चरिमे विगिंचियव्वं रिमो बहिं न कीर चहा खलु संवासो चाउम्मासुक्को ३४७९ २३०५ ६३५८ १९५९ ६३५७ १९७४ ४०३१ २४७७ ३८९४ ४६६३ ३९६६ २४७३ २४७१ २५३६ ४२६४ ३८४४ ३०५८ ४०९८ ३८०७ २८८२ ५४६५ १११५ ४४६२ २१८७ ५४४० १४८५ १६९१ ५९११ ४४१३ ४१९२ १८३०

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