Book Title: Arhan Mahapujan tatha Poshtik Mahapujan
Author(s): Vardhamansuri, Anantchandra,
Publisher: Shantilal Himaji Jasaji Mutha
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अम्मापूजनविधिः
॥ ३२ ॥
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इतिवृत्तपञ्चकेन कुसुमाञ्जलिक्षेपः ततो यक्षकर्दमं गृहीत्वा :
प्राणतर्पणसमर्पणापटुः क्लृप्तदेवघटनागवेषणः । यक्षकर्दम इनस्य लेपनात् कर्दमं हरतु पापसंभवम् ॥ १ ॥ विम्बस्य यक्षकर्दमविलेपनम् । पुनः शक्रस्तवः । ऊर्ध्वाधो० वृत्तेन धूपोत्क्षेपः पुनः कुसुमाञ्जलिं गृहीत्वा - ( ४ ) आनन्दाय प्रभव भगवन्नंगसङ्गावसान आनन्ददाय प्रभव भगवन्नंगसङ्गावसान ।
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आनन्दाय प्रभव भगवन्नंगसङ्गावसान आनन्दाय प्रभवभगवन्नंगसङ्गावसान ॥ १ ॥ लाभ प्राप्तप्रसृमरमहाभाग निर्मुक्तलाभं देववातप्रणतचरणांभोज हे देवदेव ।
जातं ज्ञानं प्रक्तटभुवनत्रास सज्जंतुजातं हंसश्रेणीधवलगुणभा सर्वदा जातहंस ॥ २ ॥ जीवन्नंतर्विषमविषयच्छेद क्लृप्तासिवार जीवस्तुत्यप्रथितजननांभोनिधौ कर्णधार ।
प्रौढप्रणयनमहासूत्रणासूत्रधार जीवस्पर्धारहितशिशिरेन्दोपमेयान्दधार ॥ ३ ॥ पापाकांक्षामथनमथनप्रौढ विध्वंसितो क्षान्त्यावस्थानिलयनिलयश्रान्तिसंप्राप्ततत्त्व |
साम्यक्राम्यम्नयननयनव्याप्तिजातावकाश स्वामिभन्दाशरणशरणप्राप्तकल्याणमाल ॥ ४ ॥ जीवाः सर्वे रचितकमल त्वां शरण्यं समेताः क्रोधाभिख्याज्वलन कमलकान्तविश्वारिचक्रम् । भव्य श्रेणिनयनक मल प्राविबौधैकभानो मोहासौख्यप्रजनकमलच्छेदमस्मासु देहि ॥ ५ ॥ ( मन्दाक्रान्ता० )
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प्रथमदिने मध्याहूने करणीयः
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