Book Title: Anusandhan 2019 10 SrNo 78
Author(s): Shilchandrasuri
Publisher: Kalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad
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अनुसन्धान-७८
ढाल - [१] थारां मुहला ऊपरि मेह झरुंखइ बीजली हो लाल - ए देशी ॥ मगध महीनइ भालि तिलक परि दीपतु हो लाल, तिल० । दीपइ देसि विचालि अमरपुर जिपतु हो लाल अप(म०) ॥१॥ राजगेह गुणगेह छई नाम नयर भलो हो लाल, छइं० । इंद्र जिस्यो नृप तेह श्रेणिक तिहां सिंहलो हो लाल, श्रेणि० ॥२॥ आवी जाणी रीसायकें इंद्रनिं अवगुणि हो लाल, इंद्र० । आसरी नृपनि आई इंद्राणि धारणी हो लाल, इंद्रा० ॥३॥ तेहनो सुत नंदिषेण सोभागी गुणनिलो हो लाल, सो० ।। वयणि अमीरस जेणि हरायो चंदलो हो लाल, ह० ॥४॥ यौवनि आयो जाम ताम तोति सही हो लाल, ताम० ।। परणाओ गुणगेह पांचसि वल्लही हो लाल, पां० ॥५॥ मणि माणिक धन खास दीयां वली तेहनई हो लाल, दी० ।। रहि नितु रंग आवास दिइ सुख देहनि हो लाल, दिइ० ॥६॥ वीणा वंश मृदंग तूरसुं सर्वदा हो लाल, तू० । नाटिक चंग सुरंग बत्तीस बद्धस्युं सदा हो लाल, ब० ॥७॥ दोगुंदुग जिम देव रमणिसु विलाससुं हो लाल, र० । विलसि सुख नितिमेव तरुणि मुख हांससुं हो लाल, त० ॥८॥ ॐ खावें पीवें गेह गाट लीइं रस भव तणा हो लाल, ली० । - प्रीउ उपरइं आठों यांम नारी लीइं भांमणा हो लाल, ना० ॥ एहवि जिन महावीर धीर गुण आगरू हो लाल, धी० । समोसर्या गंभीर तारण भवसागरू हो लाल, ता० ॥९॥ पहिली ढाल रसाल न्यानसागर भणि हो लाल, न्या० । देसि जई वनपाल नृपतिनई वधामणि हो लाल, नृ० ॥१०॥
आरामिक जई विनविउं, श्रीश्रेणिक भूपाल
वनमां वीर समोसर्या, जिनपति देवदयाल ॥१॥ ४. रांणी - क । ५. तेहनें - अ । ६. मुदा - अ । ७. महावीर - ब ।

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