Book Title: Anusandhan 2019 10 SrNo 78
Author(s): Shilchandrasuri
Publisher: Kalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad
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अनुसन्धान-७८
दादुरभोयण अहिघसण हररिपुवाहण सोइ;
ए त्रिन्हइ मइ सुंपिया, तउ प्री अप्पणउ न होइ. ९ (माटी(शरीर), हृदय, मन-त्रणे सोप्या)
शशिवाहण सू वाहणे खरी संतावी नाह;
गयगंजण गुरु आणि दे, कइ घर छंडवि जाह. १० (महादेव सुत गणेश, तेनुं वाहन उंदर; गज-गंजन - सिंह, तेनो गुरु बिलाडो, ते लाव)
कासपसू वाहण खडे, नव सत्त सल्ले तेण; कुंभकरण की वल्लही, नयणे रही घुलेण. ११ अजगिरि गुरु जागतउ, परिमल अंग गंधाइ;
अह ए रंग न वाहु --, कहि सुंदरि कित भाय. १२ (अजगिरि = रात्रि, तेनो गुरु = दीवो.) (?)
वनरिपु तसु रिपु तासु रिपु तह रिपु सुतह ज सामि; .
तसु अरि सहोयर वल्लही, लेइ रही किति ठामि. १३ (वनरिपु = सीत (ठंडी), तेनो शत्रु अग्नि, तेनो शत्रु मेघ, तेनो शत्रु पवन, तेनो पुत्र हनुमान, तेना स्वामी राम, तेनो शत्रु रावण, तेनो भाई कुंभकर्ण, तेने प्रिय उंघ)
चकवा चकवी अरिचर पति, तासु रिपु भिच्च जासु धजपति;
तासु सूअ सू अरि दमण, पूछउं पंडित सो नर कवण. १४ (चकवीनो शत्रु रात, राते चरनार राक्षस, तेनो राजा रावण, तेनो शत्रु राम, तेनो सेवक हनुमान, ते जेनी ध्वजामां छे ते अर्जुन, तेनो पुत्र अहिवन, तेनो पुत्र परीक्षित, तेनो शत्रु साप, तेनुं दमन करनार कृष्ण).
चकवाचकवी अरि उज्जोय, तसु वाहण वाहण पिय मोय; सल्ह पिता मो नही जु माह कहि किणि ऊपरि करउं छांह. १५ (?)

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