Book Title: Anusandhan 2019 01 SrNo 76
Author(s): Shilchandrasuri
Publisher: Kalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad

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Page 13
________________ अनुसन्धान-७६ श्रीविजय सेन सूरीब्दस्वाध्यायः (सटीक:) - सं. गणि सुयशचन्द्रविजय मुनि सुजसचन्द्रविजय सज्झायसंज्ञक कृतिओ घणुं करी गुर्जर भाषामां रचाती पद्यरचना छे. महापुरुषोना जीवननी घटनाओमाथी बोध पामवाना के तत्त्वज्ञानने सरळताथी समजाववाना उद्देशथी आवी कृतिओनी रचना कराय छे. वळी दैनिक प्रतिक्रमण क्रियाना अवसरे पण आवी कृतिओनुं करातुं गान-श्रवण भाविकोना हृदयमां प्रभुना उपदेशोने वधु ने वधु स्थिर करे छे. प्रस्तुत कृति पण सज्झायसंज्ञक रचना छे. कविए कृतिनुं नाम 'विजयसेनसूरिस्वाध्याय' एवं आपेलुं होवा छतांय कविए काव्यमा विजयसेनसूरिजीना जीवननी नानी-मोटी कोईपण घटनानो समावेश को नथी. ऊलटुं हरियाळीनी जेम कोई अज्ञात नारीना स्वरूपनुं वर्णन समजावी तेमणे गुप्त रहेला ते नारीना नामनी शोध करवानुं आह्वान आप्युं छे. अने काव्यान्तमां ए स्त्रीनो त्याग करनारा साधुपुरुषोमां श्रेष्ठ एवा विजयसेनसूरिजी- नाम जपतां थता 'कमलविजय'ना श्लेषथी स्वनामनो उल्लेख पण कविए कर्यो छे. कृतिगत नारीस्वरूप वर्णन ___कृतिकारना कहेवा मुजब ते नारीने ४ पति, ३ पुत्र, १६ पौत्रो छे. वळी वस्त्ररहित रहेवा छतां ते कुळवंती छे, तो परणेली होवा छतांय सासू-ससरा वगरनी छे. माता-पिता वगरनी तेणीने भाई-भोजाई नथी, तो जन्मरहित होवा छतां तेणी जरा वगरनी अने सारा तथा नरसा ए बन्नेय रूपवाळी छे. चारे वरने वहाली तेणी तेओना खोळामां ज रहेली होवा छतांय गाम, नगर, समुद्रादि कोईपण जग्याएथी तेणीनी प्राप्ति थाय छे. तेणीनो भोक्ता चोक्खो छे तो मेलो पण छे. चारे पति वडे वीटळायेली तेणी सेंकडो वार घणा जारपुरुषो वडे भोगवाया छतां कुलीन एवी तेणी हजारो पुरुषो वडे इच्छाय छे. कदाच कोई विरल पुरुष तेने पामे तो ते पुरुष भवसमुद्रमां डूबे छे. ऊलटुं तेणीनो त्याग करनार पुरुष ज मोक्षसुखनो भोक्ता थाय ___ हवे जो कोई व्यक्ति आपणी पासेथी आ हरियाळीनो उत्तर मांगे तो चोक्कस माथु खंजवाळवानो वखत आवे ज, तेवू न बने ते माटे ज कृतिकारे पोते आपणा उपर उपकार करी गुर्जर भाषामां रचायेला ते दरेके दरेक पद्य उपर संस्कृतमां

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