Book Title: Agam 11 Ang 11 Vipak Sutra Shwetambar
Author(s): Purnachandrasagar
Publisher: Jainanand Pustakaly
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चिंचा० छियाण य कसाण य वायरासीण य पुंजा गिरा चिटुंति, तस्स णं दुजोहणस्स चा० बहवे सिलाण य लउडाण य मुग्गराण य कणंगराण य पुंजा णिगरा चिटुंति, तस्स णं दुजोहणस्स बहवे तंतीण य वत्ताण य वागरज्जूण य वालरज्जूण य सुत्तरजूण य पुंजा गिरा य संनिक्खित्ता चिटुंति, तस्स णं दुजोहणस्स बहवे असिपत्ताण य पत्ताण य खुरपत्ताण य कलंबचीरपत्ताण य पुंजा गिरा चिटुंति, तस्स णं दुजोहणस्स चारग० बहवे लोहखीलाण य कडसकराण य चम्मपट्टाण य अन्ताण य पुंजा निगरा चिटुंति, तस्स णं दुजोहणस्स चारग० बहवे सूईण य डंभणाण य कोट्टिलाण य पुंजा गिरा चिटुंति, तस्स णं दुजोहणस्स चारग० बहवे सत्थाण य प्पिलाण य कुहाडाण य नहछेयणाण य दब्माण य पुंजा णिगरा चिटुंति, तते णं से दुजोहणे चारगपाले सीहरहस्सरण्णो बहवे चोरे य पारदारिए य गंठिभेदे यरायावगारी य अणधारए य बालघाती यवासंभघाती य जूतिकारे य खंडपट्टे य पुरिसेहिं गेण्हावेति त्ता उत्ताणए पाडेति त्ता लोहदंडेणं मुहं विहाडेति ता अप्पेगनिए तत्ततंबं पजेति अप्पेगतिए तउयं पजेति अप्पेगतिए सीसगं पजेति अप्पे० कलकलं ५० अप्पे खारतेल्लं ५० अप्पेगतियाणं तेणं चेव अभिसेगं करेति अप्पे० उत्ताणे पाडेति त्ता आसमुत्तं पज्जेति अप्पे० हत्थिमुत्तं पज्जेति जाव एलमुत्तं पजेति अप्पे० हेट्ठामुहे पाडेति छलछलस्स वमावेति ता अप्पेगतियाणं तेणं चेव ओवील दलयति अप्पे० हत्थंदुयाहिं बंधावेइ अप्पे० पायंदुयाहिं अपे० हडिबंधणं करेति अप्पे० नियलबंधणं करेति अप्पे० संकोडियमोडियए करेति अपे० संकलबंधणे करेति अप्पे० हत्थछिण्णए करेति जाव सत्थोवाडिए ॥ श्री विपाकदशाङ्गम् ॥
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पू. सागरजी म. संशोधित
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