Book Title: Agam 06 Ang 06 Gnatadharma Sutra Part 01 Sthanakvasi
Author(s): Ghasilal Maharaj
Publisher: A B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti

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Page 707
________________ अनगाारधर्मामृतवर्षिणाटीका अ. ३ जिनदत्त-सागरदत्तचरित्रम् निस्सरतः प्रतिष्क्रिम्य 'हत्थसंगेल्लिना-अन्योन्यं हस्तावलम्बनेन सुभूमिभागे उद्याने बहुषु 'आलिघरएसु' आलिगृह के षु श्रेणिबद्धगृहाकारपरिणतवनम्पतिविशेषनिकुञ्जेषु च-पुनः ‘कयलीवरेसु' कदलो गृह केषु-कदली निकुन्जेषु च 'लयाघरएसु' लतागृहकेषु-चंपकाशोकादिलतागृहेषु च 'अच्छणघरएसु' आसनगृहकेषु आसनं-उपवेशनम् तेषां गृहेषु यदा तदा जना आगत्य सुखासिकयोपविशन्ति यत्र तत्र च 'पेच्छणघरएस' प्रेक्षणगृह के घु-प्रक्षण-प्रेक्षणकं तस्यगृहेषु-यत्रागत्य जना नाटकादिकं कुर्वन्ति प्रेक्षन्ते च तेषु 'पसाहणघरएमु य प्रसाधनगृहकेषु प्रसाधन मण्डनं यत्रागत्य जना स्वं परं च मण्डयन्ति तेषां गृहेषु 'मोहणघरएसु' मोहनगृह केषु-विलासगृहेषु 'सालघरएम' शाला गृहकेषु शाला शाखा तासां गृहेषु वस्त्रगृहेषु वा' जालघरएम' जालगृहकेषुजालिकान्वितगृहेषु यत्राभ्यन्तरस्थिता बहिः स्थित ने दृश्यन्ते किन्तु अन्तः गणिका के साथ (थूणामंडवाओ पडिनिक्रनमंति) उस स्थूणामंडप से बाहर निकले (पडिनिक्खमित्ता) बाहर निकल कर (हत्थसंगेल्लीए) हाथ में हाथ मिलाए हुए वे (मुभूभिमागे उजाणे बहुसु आलिघरएमय) उस सुभूमिभाग उद्यान में अनेक श्रेणिवद्ध गृहाकार परिणत हुए वनस्पति विशेषों के निकुंजों में (कयलीघरएसु य लयाधरएसुय) कदलीगृहोमें और लतागृहोमें (अच्छण घरएमु य) यदा कदा आई हुई जनता को बैठने के लिये बनाये हुए आसन गृहों में (पेच्छणघरएसुय) जहां पर आकर के जन नाटक आदि करते हैं और देखते हैं उन प्रेक्षण घरों में (पसाहणघरएमु य) प्रसाधन गृहीं में-जहां आकर के मनुष्य अपने को और दूसरो को अलंकारो से विभूषित करते हैं ऐसे घरोंमें (मोहणघरएमुय) विलास गृहो में (सालघरएसु य शाला घरौं में (जालघरएमु य) जालिकान्वित घरों में जिनके भीतर रहे हुए (पडिनिक्खमित्ता) मडा२ नीजीन (हत्थस गेल्लीए) डायमा हाथ नाभीन तमा (मुभूमीभागे उज्जाणे बहसु आलिघरएसु य) सुभूभला उधानमा माता ઘણા શ્રણિબદ્ધ ઘરના આકાર જેવા વનસ્પતિ વિશેષથી બનાવવામાં આવેલા નિર્કમાં (कयलोघरएमु य लयाघरएसु य) ४४सी डामा, सताडामा, (अच्छणघरएसु य) अपानवार सावता सामाजिओने सवा माटे मनापामा सावेद भासनलमा (पेच्छणघरएसु य) भाशुसेज्या मावीन नाट वगेरे ४२ छ भने गुमे छ तेवा प्रेक्षाडमा (पसाहणघरएसु य) प्रसाधन मा मेटयां भाशुसे। पातानी जतने भने भीमाने शशमा छ, तवा धशमा, मोहणघरएसु या विलासगृहमा (सालघर एमु य) शाखामा (जालघरएसु य) जीवास घशमा मेरो શ્રી જ્ઞાતાધર્મ કથાંગ સૂત્રઃ ૦૧

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