Book Title: Adya Panchashaka Curni
Author(s): Haribhadrasuri, Yashodevsuri
Publisher: Devchand Lalbhai Pustakoddhar Fund
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भावकधर्मपश्चाशक
चूर्णिः । ॥ १३१॥
सानोमा गुणाः अनशनस्थानस्वरूपं
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बोहीयत्तं अणंतसंसारियत्तं च ॥ २४ ॥ आलोइयंमि इमे गुणा भवंति-" लहुया तहाईजणणं अप्पपरनिवत्ति अजवं सोही । दुक्करकरणं विणओ(आणा) निसल्लत्तं च सोहिगुणा ॥ २५ ॥ अइयारभारोयारणेण लहुओ भवइ, अणालोइए ससल्लोमित्ति सरीरमणोदाहस्स आलोइए पसमाउ पल्हातो सीइओ भवइ, सेसं सुगम, कहं पुण आलोएयवं? जह-" बालो जंपंतो कजमकर्ज च उज्जुयं भणइ । तं तह आलोएजा मायामयविप्पमुक्को उ ।। २६ ॥ उप्पन्ना २ माया अणुमग्गओ निहतबा । आलोयणनिंदणगरिहणाहिं न पुणो य बी(का)यति ॥२७॥ नाणनिमित्तं आसेवियं तु वितहं परूवियं वावि । चेयणमचेयणं वा दत्वं गहियं अकप्पं तु ॥ २८ ॥ नाणनिमित्तं अद्धाणमेह ओमेऽवि अच्छइ तदट्ठा । नाणति आगमिस्सं कुणइ परिक्कम्मणं देहे ॥ २९ ॥ पडिसेवइ विगइओ मेज्झ दवे व एसइ पिबह । वायंतस्स उ किरिया कया उ जहसत्ति जयणाए ॥ ३० ॥ एमेव देसणमि वि सद्दहणा नवरि तत्थ नाणत्तं । एसणइत्थीदोसो वयंति चरणासिया सेवा ॥ ३१ ॥ एवमादि, "जे ताव संभरेजा अइयारा ते तहेव आलोए । जे पुण न संभरेजा ओहेणं ते समालोए ॥ ३२ ॥जे मे जाणंति जिणा अवराहा तेसु तेसु ठाणेसु । तेऽहं आलोएउं उवडिओ सबभावेणं ।। ३३ ।। एवंपि हु वियतो विसुद्धभावपरिणामसंजुत्तो । आराहओ उ भणितो गारवमायाहि परिमुक्को ॥ ३४ ॥" केरिसए पुण ठाणे पच्चक्खायचं , जत्थ गंधविया संगीयं करिति सिक्खंति वा तत्थ न ठायचं, तेसिं समीवे वा, जो तत्थ झाणवाघाओ भवइ, निदाणं वा करेजा, तहा हस्थिसालाए वा तिलपीलणसालाए वा कुंभकारसालाए वा रयगसालाए वा न ठायवं, जओ एयासु कम्मं करेंता अकरेंता य गायति कंदप्पं च करेंति, रायसंदसणपहे वा न ठायव्वंति, नियाणकरणदोसाउत्ति, एवं चारगचट्टसालकलालावणाईणिवि झाणवाघायहेऊणि विभासियवाणि, तहा
4- 445C
॥१६
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