Book Title: Acharanga Sutra
Author(s): Sudharmaswami, Mayachand Matthen
Publisher: Vikramnagar

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Page 73
________________ | जिसम्मतियासदातामाणेतिपासद जामाणेतिपासवानसमेतियासक्षानमंसकसिदिलदिश्रादिकमाणहिं गुणासात सिकाइवधाकरनाasu जिसपसम्पयज्ञानतमा सुनिनसा अनमोनमुनिनौ सावदेवतेसम्पयनानदेषजविवेकलावन नाम शानदीनचारित्रशिथलाजेमेव आपत्रकुलवादिकै कपने बानीकेदार जावादि घदेष॥ जीबीएनलेशान नवा रिननीएकाम्सवमायपणजोणित बीतेपालीनसकीयश्वजीकेण विहश्करीजेपामावतिया विषाचोदणहारक्षा परस्परसस्वारीपणाथकोएमनुष्टीनजेएइतेलापाजीना लीनसकी | कस्बा सकारतेकदन॥ प्राचारंग ३७ वऋचारिमायावीश्यानी य-विषयकयायादि गारदस्त्पूणानासेवादारतेणे एमुनिनीअनुष्टानयालिवान कशाबशारीरकदारिक प्रभवा पातविरमवातविणादिकतिदाधारकर्मवीदारिवासम नसकीयस्तयाबारीक प्रमादयतिष्पालान सकूपबाधिवेवाका किमतकदमुलीसुनितस्वमालारामाग कामगारीराकरणपरितेकद अल्पतमानदेलूपउविगतके हवा समसावा कामकsantaमुनिकतावसम्हसावद्यावष्टानवतस्यसमादायादव॥ देवे॥ पहिरवठादार सेवा तत्वादिषणहारतेवेत हरेकजणाबोकराउतकहना दिविकसमायारेदिीपमान्नहिगारमावसातदि।मुणी माममायाएकणकम्मसरीरगोपतवदासबतिवीरासमन्त्र २.प्रवतियणविज्ञावउतरे संसारथकीतामुनिबासुस्पतरसंगनासावथक मूकाण। तिनलिकसाराध्ययनरतीयोउदेशकसमाप्तः॥३॥ीजाशदिमादिदोषधकी PRASHANTHAविरएकप्तीसावयश्रका निस्ताविया०ावबापानायक नितम्रनिप्राइमकक्ष्यमतिदोपकचरनासनिमधासावतहमदाषासावन mmaमादिमोन wिas. मगधराटिकैश्नवसीस्वामिकदश्वरजवषा एकहनशदिवश्वधवउद्देमाकदियबाश्री॥३॥ वरसमा हिवता गजनितिमाश्व देसिएगा एसउदंतरेमुणनितिमुत्तेविरएवियादिशान्निाबमिश लोकसाराधयनरतीयोदेशकः॥३/म:||गा समाहिकदम अमनचीमबर मामानुयाधिदरताएकाकीसाधन मात नेमविश्यायरिग्यासाक अविश्रव्यक्त करुनोजेक्रनेकरीमुक्त गावकरी वय किणहीपकिससंयूमिनुष्टानविषमायावतापमास सामान जगमनधाईजानांचकुलपतिकलपEOSमसमस्तनई नयाई भव्यक्त क्रतांकरप्रवक्ततेकरियरजेणाचा बेल्यातासीरुधर्मश्चनिश्चीयापेखाएकाजाम SHANKAR सनइफफ्नवश्भरहनकापरसला किसजेहवानश्कहनाअाधकाला Has रोगप्रयधकालपनमगवगेतनानितिगनिष्पकृपक्रोधवश्वसिपऊच॥ नश्वकर इनही॥ऽपराक्रतिक हतास्वानएकाकी का तिनश्नवापूर्वमात्रामावसणीनतेत समानुपऊपरकावरपासपऊप जिममततदने नयाईएतावताएकाकीस्वानमपामा जून अव्यक्त नयावश्करी व्यक्ततेकक्ष्यिजगamam मागफगामा55ऊमारमस्साऽजा जप्परिकतलव प्रवियनरम निरक्रमावियसाविपागचाश्या कप्पा मारा यनिकल्पश्अगीतार्थपणश्यमभनेत्रआत्मामीविराधनाध्यााएबीनसागउनया तश्करीव्यक्तव्यश्करीव्यूकहनापणिएकनिकल्पवाजपणानमा विसर्वलोकनपरि नामदाएपनि सामथार रबीनसागस्तथानिऋतमध्ययश्करीजेयतहमाश्मनश्अदिशिएकवर्याआधरमपलिएकवीमारकचयनिकल्याणीनिहाधणादाषऊपजइपरतदानानोगतयात्रा गगतनश्मतवइनहायुरुनामादिविणवत्तायुगऊपजातिणिोपनहीवलीकर्मनशविशिएकयुमनवनिनमानशतक25a531 अवियलम्सएकमात्र तमव्यय करीव्यक्तते एकच

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