Book Title: Acharanga Sutra
Author(s): Sudharmaswami, Mayachand Matthen
Publisher: Vikramnagar
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भानथनीपजावर साकनाश्तोगविआवश॥ आविवानिकि मनमाझिमजा तिमक रिस्पजिमकाईजाणिस्पनी तथासाकतेअसमादिकीयमाश्रयक
रावाजालशकिमीशाइतेकदा॥
allallयाणासमारेषजावाश्राम्हटुवयति आवसादया समुस्सिएगा निमितपरिघासतबसिधुजणि सहसमस्याएायणीमतिई एतावताज्ञानविज्ञ तथ्यामिरातेदनापरिजमादिकक जएगृहस्समादरमर्थित्यमा बानथापरवागशेषलंकदतीतीर्थकरनश्ता हलिसलीयतालप्रकारे मार दिकपाणी यानमनिकरी बश्वपा॥
मनश्यखHTTPSSSSS डशा सहसंमस्याए)परवागरणणी अणेसिंघातिए मात्रा प्रोखलुगाहावती ममाए असणवाधाबवाव पाणआरंसकरा आश्रयकरावश्व मिश्वारित्रीय सम्परपकारिताबीजाणीमतगृहस्त नरजगावरणियारसको उपाहारादि
कदिउसोगवएदवाश्रध्वपनदीविवकवतश्रावकजाणतजपिकनियुक्ति प्रकास मनहति Alsकेत मादिदोषपामुकह देषामशास्कएषणीयदानमा फलकहानिकारनाममाप्ति
MANOTHERITTEIRA विषाको समाबजाागतिकहीस्पर नेकदasmssd पाणाशासमारंजावावति श्रावसदवा समुस्सिरणाति तंबसिडायमिालदाय। अागामना आणावजा अया असितारेकनिवामादिछिक कमकदीमाकमीअनुमाविना आहारादिक सौजाणऊपहनवादावचनबाजी से तेराजादिक मूटिकाजलपरीमाणातम्वये अथवाबलात्कारिकरीयापिम्पउनेशको साकाआधारजाउमाकनमा बिना जाणवलकरी ऊसासनगाकाराद तथा अनेरनिरूपिवासलीपिरअरेगानि काश्करचारित्रायमनिमंत्रइतिवारतमाकसदोषनाशीमपनतोगनिवारतेगुरुस्व अनक क्वनकोतप्रतिमकरसातमकरणादकताकापसावा आदरमहा शिवारकानसगिरी सिवानिकताममादिकरणकरश्तकारजमा करण्याविना मोहिंदरसपादादि
आहारापकर थाका नाचणाममश्पशिक्विनमारुचकरुतीयालीसाफआयसिदकतिबारश्तेदनअपेरि सिव निबेमिनामिकुववनामुष्ठावा अपुतावाजिशम आदचा गया उसंसिहंतादणारखणद
लोगचारित्रीयानझसेतिकस्तोऊपजाबपौविकिम
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