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विज नौर।
इतिहास कहता है कि पुराना नगर गिर गया था तब मेरठ जिले के मुरारी के अग्रवाल बनियों ने १२ वीं शताब्दी में फिर से बसाया । उन अग्रवालों के नाम द्वारकादास और कटारमल था उनकी संतान अभी तक यहां के मुख्य निवासी हैं । इसी स्थान को चीनी यात्री हुइनसांग ने मोतीपला लिखा है । यह यात्री यहां ७ वीं शदी में आया था। यहां वौद्धगुरु सिंहभद्र का स्तूप है जो पहली शताब्दी का अनुमान किया जाता है। यही स्थान सिंहभद्र के शिष्य विमलमित्र का समाधि स्थान है । दूसरा बड़ा टोला है जिस पर ग्राम मंडी बसा है जो किले के उत्तर पूर्व १ मील के करीब है। मध्य में सन्दर ताल है जिसके चारों ओर बहुत से टीले हैं । लालपुर के ग्राम में गुणप्रभ का मठ है ।
( नोट-यहां जैन चिन्हों की अच्छी तरह जांच होनी चाहिये।
(३) मोरधज-पर्गना-तहसील नजीवाबाद । पुराना ध्वंश किला नाजीबाबाद से कोट द्वारा की सड़क के पूर्व नजीबाबाद से ६ मील है।
चंदन बाला-ग्राम में है। वह बड़ा नगर था। बहुत ही पुरानी जगह है । खंडहरों में पुराने नमूने की बड़ो ईंटे हैं। इस स्थानकी इंटे नजीबाबाद के पास पथारगढ़ बनाने में लगी हैं। किले के भीतर शिगरी नाम का बड़ा टीला है-यह एक वौद्ध
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