Book Title: Samudrik Shastram
Author(s): Mansukhlal Hiralal
Publisher: Hiralal Hansraj Shravak

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Page 46
________________ (४३) अथ स्त्रीलदाणानि कथ्यते-यथा कि. ज्ञायते रत्नं । शुनाशुनमिति स्मृतं ॥ वदंति च प्रशस्तं च । स्त्रीणां वक्ष्येऽथ बदणं ॥२१॥ मातरं पितरं चापि । वातरं देवरं तया ॥ भः तारं च विना नारी। रक्षणरहिता सदा ॥श्शा हस्तपादौ परीक्षेत । चंगुलीश्च नखांस्तया ।। पाणिरेखाश्च जंघाश्च । कटिं नानिं तथैव च हवे स्त्रीनां लदाणो कहे जे-जेम र. लनी परीक्षा करीने शुभ अशुन विगेरेनो निर्णय थाय , तेम स्त्रीननां लवणोनो निर्णय कहुं बु ॥ २१ ॥ माता पिता नाश देवर तथा गार विनानी स्त्री रक्षणरहित कहेवाय . ॥५॥ हाथ पग यांगन नख हायनी रेखा जंघा केम नानि ऊरु उदर स्तन सुजा गती कपाळ मस्तक केश रोमरा Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com

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