Book Title: Rajasthani Hindi Sankshipta Shabdakosh Part 01
Author(s): Sitaram Lalas
Publisher: Rajasthan Prachyavidya Pratishthan

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Page 752
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra नाथियउ www.kobatirth.org ( ७४३ ) नाद-पु० [सं०] १ ध्वनि प्रावाज शब्द २ गर्जन, चीत्कार, चिल्लाहट । ३ सानुनासिक स्वर । ४ वर्णों के उच्चारण की क्रिया । ५ संगीत । ६ उद्घोष । ७ योनि, भग । ८ हरिण के सींग का बना बाजा । ६ गुरु मंत्र । १० अनाहत शब्द । ११ अहंकार, गवं । १२ देखो 'न्याद' नादरणबरण, नादवरण-पु० कपास । नादमुद्रा पु० [सं०] तंत्र में हाथ की एक मुद्रा । नादर-१ देखो 'नाजर' २ देखो 'नादिरसाह' । नादरणौ (बौ) - क्रि० ग्रादर, सत्कार नहीं करना । नादरसा (साह) - देखो 'नादिरसाह' । नादली स्त्री० [० नादन] कुरान की चायत खुदी, तावीज या गंडा । नादांग, नादांणियों, नादांणी-देखो 'नादांन' । नादांन - वि० नादियउ नाथियोड़ी-वि० १ नाथा हुन । नापणी (बी) - क्रि० [सं० मापन् ] १ लंबाई-चौड़ाई आदि का २ नत्थी किया हुआ, छेदा हुआ । अर्पणम् ] मान निकालना, परिमाण निकालना । २ परिमाण का अंदाज करना, निर्धारित करना। [सं० न ३ नहीं देना, नहीं अर्पण करना । - । नावी-रो-बाड़ी पु० वेश्याओं का अड्डा, चकला नायोत- पु० राठौड़ों की एक उप माया । नाथौ - वि० [सं० नाथ ] १ नाथा हुआ । २ देखो 'नाथ' । नादंग-देखो 'नाद' । नाप-तीस ० १ नापने या तोलने की क्रिया या भाव। २ नाप या तौल का परिमाण । 1 नापसंद वि० १ जो प्रच्छा न लगे पसंद न हो २ कर अप्रिय । ३ जो ठीक न लगे । नापाक - वि० [फा०] १ अपवित्र, नावाकी स्त्री० [फा०] पवित्रता, नापित - पु० [सं०] नाई, हज्जाम । नाफ-स्त्री० [फा०] नाभि, तोंदी नाफरम, नाफुरम-पु० [फा० ना' - फरमान ] एक प्रकार का [फा०] १ नासमझ, अबोध । २ मूर्ख | ३ अनजान । नावांनी स्त्री० [फा० नादानी) नासमझी, पूर्वता । नादार - वि० [फा०] १ निर्धन, गरीब । २ कायर, डरपोक । ३ देखो 'नाजर' | नादारगी, नादारी स्त्री० [फा० नादारी] निर्धनता गरीबी। २ कायरता । नादि-देखो 'नाद' | नादिर- वि० [अ०] १ मनोधात २ श्रेष्ठ, उत्तम देखो 'नजर' | नादेसुर - पु० [सं० नंदीश्वर ] १ शिव, महादेव । २ नंदी । नात वि० पासुरी वृत्ति से रहित । पौधा । नाफेरी देखो 'नफेरी' । नादोत - पु० सिसोदिया वंश की एक शाखा व इसका व्यक्ति । नाप - स्त्री० [सं० मापनम् ] १ किसी वस्तु या क्षेत्रादि की लंबाई-चौड़ाई का परिमाण २ नाप करने का उपकररण । ३ मापने की क्रिया या भाव। नादिरसा, नादिरसाह - पु० [फा० नादिरशाह फारस का एक नाभंग - देखो 'नाभाग' । क्रूर व शक्तिशाली बादशाह । नाभ - देखो 'नाभि' । नादिरसाही स्त्री० [फा० नादिरशाही १ निरंकुशता, क्रूरता । २ अत्याचार | ३ नादिरशाह की नीति व कार्यं । नावी वि० [० नादिन् । ध्वनि करने वाला । नादु- देखो 'नाद'। Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir नाभादास नाफौ- पु० [फा० नाफ: ] मृग नाभि में होने वाली कस्तूरी की थैली । नाबालक देखो 'नाबालिग' । नावाळकी देखो 'नावाळिमी' | नाबाळग- देखो 'नाबालिग' नाबाळगी-देखो 'नाबाळिगी' । नाबालिग व० [फा०] १ अवयस्क अबोध २ कानून द्वारा वयस्क होने के लिए निश्चित उम्र से कम । नाबाळिगी स्त्री० [फा०] १ अवयस्क या प्रबोध अवस्था । २ कानूनी वयस्कता से कम उम्र । नाबी स्त्री० [देश० ] मानवी चित्र चित्रित करने का उपकरण । नाबूद वि० [फा०] १ ध्वस्त बर्बाद नष्ट २ लुप्त गाय 1 शुद्ध । २ मैला - कुचला । शुद्धता ३ नश्वर । बेड़ी पु० [देश० ] हाथ की अंगुली के नाखून का फोड़ा । नाभकंज-पु० [सं० नाभिः कज ] जिसकी नाभि में कमल है, विष्णु। नामकवळ (कमळ, कवळ) पु० [सं० नाभिः कमल] तंत्र के अनुसार शरीरस्थ छः चक्रों में से एक, मणिपुर । नामनंद पु० [सं० नाभिनद] जैनियों के प्रथम तीर्थंकर For Private And Personal Use Only नाभाग - पु० [सं०] १ राजा भगीरथ का पौत्र एक सूर्यवंशी राजा । २ मार्कण्डेय पुराण के कारुष वंश के राजा, जो दिष्ट के पुत्र थे। नामादास पु० इम जाति के प्रसिद्ध संत, जिन्होंने पान की रचना की थी ।

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