Book Title: Nandanvan Kalpataru 2017 11 SrNo 39
Author(s): Kirtitrai
Publisher: Jain Granth Prakashan Samiti
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अबाध्यसिद्धान्तमनन्तपर्यवं
विशुद्धविश्वार्थविदा विवेचितम् । सतां मनस्तोषकरं तमोहरं
जयत्यधृष्यं परमात्मशासनम् ॥२०॥ वचस्विने मित्रहिताय सर्वतः
प्रबोधशुद्धामृतदायिनेऽनिशम् । सुधर्मपुण्याय धुरन्धराय सन्नमोऽस्तु नित्यं विमलात्मनेऽर्हते ॥२१॥
इति जगत्कर्तृत्वनिरासर्विशिका ॥

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