Book Title: Nandanvan Kalpataru 2017 11 SrNo 39
Author(s): Kirtitrai
Publisher: Jain Granth Prakashan Samiti

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Page 14
________________ तस्मादवश्यं परिहाय कार्य स्त्री-पुत्रसेवापरिपोषणादि । वित्तं गृहं सर्वमिदं निरस्य . पुण्यप्रदं पर्व उपास्यमेतत् ॥६॥ दिनाष्टकेऽस्मिन् बहुभावपूर्व व्रतं तपोदानदयादियुक्तम् । भूतापराधावलिसन्निरासः प्रतिक्रमः पञ्चविधः क्रियेत ॥७॥ यतीश्वराचार्यगुरोश्च पूजनं तद्वन्दनं दर्शनभावसम्भृतम् । जिनेन्द्रशास्त्रश्रवणं निरन्तर मेकाग्रचित्तेन विधीयतामिह ॥८॥ जिनेन्द्रचारितभृतं मनोजें मुक्तिप्रदं पुण्यविवर्धनं च। श्रीकल्पसूत्रामृतसारपानं कुर्याच्छ्वोभ्यां दुरितावलिघ्नम् ॥९॥ अतस्तु सच्छावकवर्यवृन्दै जिनेन्द्रवाक्यं परिपालनीयम् । शक्त्या च वित्तार्णणमेव कुर्याज्ज्ञानोद्भवे जीवगणावने च ॥१०॥ इति पयूषणपर्व-महिमा ॥ ६

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