Book Title: Nandanvan Kalpataru 2017 11 SrNo 39
Author(s): Kirtitrai
Publisher: Jain Granth Prakashan Samiti
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हाईकु-अष्टकम्
डो. वासुदेवः वि. पाठकः 'वागर्थ'
(१) स्नेहस्य बिन्दुः
नाशयेत् कटकटम्: .: यथा दोलायाम् ॥
(२) दण्डयोजना
का सन्तानविरुद्धा? मूर्खाः किं वयम् ?
(३) प्रकाशस्येच्छा
आलोकलेख्यस्याऽर्थम्: अन्धकारस्य ॥
(४) सर्वे तृषार्ताः
वर्षस्यमृतं; किन्तु बिन्दुश एव ॥
(५) छायामप्यहम्
आर्द्रामार्दा पश्यामि; अश्रूणि नेत्रे ॥
(६) अकल्प्या नूनं
वर्षति महासारा कविता-वर्षा ॥
(७) काष्ठं विचार्य
तर्तुं यत्र स्थितवान्, स किं मकरः?
(८) पूर्णचन्द्रेऽपि
अपश्यमपूपं हि; बुभुक्षितोऽहम् ॥
३५४, सरस्वतीनगर, अहमदाबाद-१५

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