Book Title: Agamoddharak Kruti Sandohasya Part 06
Author(s): Manikyasagarsuri
Publisher: Mithabhai Kalyanchandji Pedhi
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________________ आगमोद्धरक-कृतिसन्दोहे प्रतिदिनं भवनं परिपूजकै रिदमनाहतभावधरैर्वरैः। भरितायतपूजनतत्परै-जति चानुदिनं शुचिसिद्धये (कीर्तितति परमां भुवि ) // 29 // यथैव मोक्षाध्वनि दर्शनादिकं, मिथो विमिश्रं जनतेष्टसिद्धये। तथैव शास्त्राणि पदानि सिद्धर्थ , स्युस्तद्गणेशालियुतानि सन्ति / मार्गे जैने पूज्यतां ते प्रयान्ति, ये स्युः सिद्धाः साध्यता वा श्रिताश्च ( साधकत्वं गता वा) तमाराध्यास्तत्र दारार्थरक्ता, नहि स्यात् साधोः सक्तसेवा मनीषा // 31 // एकादशी तत्प्रतिमा प्रपन्नः, श्राद्धो न वन्द्यत्वपदं समेति / मार्गानुयायी गतशास्त्रबोधा, मुनिः सुरेन्द्रैः परिषेषणीयः / / ये मोक्षं परिसाधयन्ति जिनपाल्लब्ध्वा ससम्यग्दृशम् / पापेभ्यो विरति समस्तविषयां वाणी त्रिपद्यात्मिकाम् // यावत्तीर्थमशेषभव्यहितदां जग्रन्थुराप्तोदिति, ते सर्वे गणधारिणः शिवपदाप्यै सन्तु भव्याङ्गिनाम् // 33 // OXX2ZWYYDYZEXLYX29223XXXXXX पू. आगमोद्धारक-आचार्यप्रवर-श्राआनन्दसागरमरिकता ॥श्रीगणधरपट्ट-द्वात्रिंशिका समाप्ता॥ OMIRRRRRRRRRRRROWNRISTMAS OSVAPALIPO P.P. Ac. Gunratnasuri M. un Gun Aagadhak Trust ned by CamScanner

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