Book Title: Acharangasutram Sutrakrutangsutram Cha
Author(s): Sagaranandsuri, Anandsagarsuri, Jambuvijay
Publisher: Motilal Banarasidas
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P. L. शुद्धः पाठः 163 19 रूपां वितीर्णः 163 23-24 पर्यायाधिकेन समवयसा वा 163 25 संमत एवं चोदित इति, एवमनुशा 16333 अत्युत्थिता, यदि वा 163 35 स्थितयाऽपि कुपि॰ [प्र.] 16336 आत्माधमेनापि [प्र०] 164 ___4-5 न कुप्येत्, उक्त च-पाष्टेन [प्र.] 1647 तत्पीडाकारि [प्र०] 164 9 कश्चित् पुनः [प्र०] 164 12 अनुशासति 164 12-13 वतारणतोऽनुशासित [प्र०] 164 14 बुद्धा मां सम्यग [प्र.] 164 22 °मप्यपश्यन्न [प्र०]
23 दरी 164 35 शिक्षकोऽप्यभिनव 164 39 स्वर्गापूर्वदेवता [प्र.] 165 तदपकारेऽनपकारे वा [प्र.] 165 9 संयमादविचलन् [प्र.]
17 शकारी सदाज्ञाविधायी [प्र०] 16521 मनोवाक्कायगुप्तिभिः [प्र०] 16533 मोक्षाख्यं 166 9 पायरियसयासा धारिएग 166 10 होति 166 15 मन्यतरोनरो वा कश्चिदाचार्यादिः 166 18 समस्तशास्त्रार्थवेत्ता 166 21 बहुधनो दीर्घायु 166 24 जीवितं तद् मन्त्र [प्र०] 166 36-37 व्रतं--मृद्वी शय्या [प्र०] 166 37 भक्तं मध्ये [प्र०] 16639 तथ्यमपि 167 1 किञ्चिद° [प्र.] 1673 °मानं नो विक
4 अकषायी [प्र.] 167 19 वोच्चरितेने
20 अर्थ स्तोकं [प्र.] 20 शब्ददर्दुरेणा [प्र०] 38 प्ररूपयेद् [प्र.]
L. शुद्धः पाठः 13 यथावस्थितप्ररू° [प्र०] 14 धर्म च श्रुत 19 ज्ञानादिकं भावसमाधि 32 ववदिसंती
एतेन कारणेन 34 पड़प्पन्न
अयवयतयणय गतौ [प्र०] 8 भवति दर्शनावरण 10 पृथगावरणप्रतिपादनेन 12 स्पर्शरसगन्ध 13 ऽपि विशेषहेतो 21 भवतीत्यतोऽहंन्नेव 23 °देव तीथिका 28 ब्रुवते क्वचित् । 39 तीर्थकृतोऽयं धर्मः 11 संसारोपरि वर्तमान 16 मोक्षावाप्तौ तथापि 15 अतिवर्तन्ते वा 40 कृत्वा, अतो येन
5 धारणतया 13 ऽन्तं पर्यन्तं सर्व॰ [प्र०] 14 क्रियया वा उत्पन्न [प्र.] 15 अनुशासति 28 प्रवेशनोपायभूतो 29 मतिनीय [प्र.] 3 मन्तवर्ती विव
न्तप्रान्तानि [प्र.] 8 मानुष्यके [प्र०]
मनुष्यलोके [प्र.] 14 सुयं च मे 31 'मर्थं धर्मार्थ 34 अनुतिष्ठन्तिच 35 अनन्यसदृशज्ञान [प्र०] 37 तथा चोक्तम् [प्र०] 8 यस्मात् स्थानात् तदनुत्तरं स्थानं, तच्च सत्
संयमाख्यं ll सिद्धि मवाप्नुवन्तीति [प्र०] 22 भूताः सुव्रताः सत्सं
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