Book Title: Sannyas Diksha Pratibandhak Nibandhna Musadda Uper Vichar Karva Nimayeli Samitinu Nivedan
Author(s): Sanyas Diksha Pratibandhak Samiti
Publisher: Sanyas Diksha Pratibandhak Samiti

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Page 50
________________ आ बधी वातो विचारमा लेता एवी कल्पना थई शके छे के कमीमां कमी सोळ वरस पहेलां जोईए तेवी साधारण समज बाळकमां आवी शके नहीं तो पछी संसारनी वस्तुओ संबंधी वैराग आवी दीक्षा लेवानं भावना तो भाग्येज थई शके. वळी दक्षा आपवामां आवे तो पण तेने अंगे जे कष्ट सहन करवानां छे ते सोळथी नानी उमरे भाग्येज सहन थई शके, आ उपरथी एम अनुमान थई शके के प्राचीन काळमां धर्मशास्त्रमा जो के आठ वर्ष पछी दीक्षा लई शकाय एम लखेलु छे तोपण तेमां दीक्षाना उमेदवारनी उमर शिवायनी बीजी लायकी संबंधे जे शरतो राखेली छे तेनो विचार करतां पण एम लागे छे के, उमरनी यत्ता करतां बीजी लायकी उपर वधारे लक्ष अपायलं हे; अने तेने लीधेज साधारण रीते आठ वर्षनी उमरे भाग्येज कोईने दीक्षा अपाय छे. घणु करीने चौद, पंदर के सोळ वर्षनी उमरे दीक्षा अपायेली जोवामां आवे छे पण एटली उमरे अपाती दीक्षाओ करता तेथी मोटी उमरे वधारे दीक्षाओ अपाय छे. एटले जो दीक्षा माटे कमीमां कमी उमर सोळ वर्षनी टराववामां आवे अने तेथी नानी उमरनाने दीक्षा आपवानुं बंध करवामां आवे तो हालनो समय जोतां कोईपण रीते अयोग्य अगर सख्ताई भरेलं थशे एम अमने लागतुं नथी. केटलाक सुधारकोनो अभिप्राय एवो छे के, सज्ञान वयनी उमर कायदा प्रमाणे १८ वर्षनी वये थाय छे, तेथी ते उमर पूरी थया वगर दीक्षा आपवानुं बंध थर्बु जोईए. तेमनी दलील एवी छे के १८ थी कमी उमरनो सखस कंई करार करवाने नालायक गणाय छे तो पछी संसार त्याग करवाना अने मिलकत परनो पोतानो हक उठाववाना दीक्षा लेवा जेवा महत्वना काममां १८ वर्ष उमरनी पहेला तेणे दीक्षा लेवा माटे आपेली संमति निरर्थक गणवी जोईए. आ दलील जो के ठीक छे तोपण ते स्वीकारतां पहेला बीजा चालू कायदानो पण विचार करवो जोईए. सज्ञानपणानी उमर अने पाल्यपालक संबंधी निबंधमां सज्ञान वय १८ नी ठरावी छे तोपण तेज निबंधनी कलम ६ थी एq ठराव्युं छे के ए निबंधी ठरावेली उमरनी यत्तायी कोई पण सखसना धर्मने, धर्म संबंधीना कृत्यने तथा संप्रदायने बाध आवशे नहीं. अर्थात् १८ वर्षनी उमरनी यत्ता कायदाथी धर्म जेवी बाबतने लागू करेली नथी. माटे दीक्षा लेवाना काममां पण कायदेसर संमति आपवानी यत्ता १६ वर्षनी राखवामां आवे तो ते काई कायदा विरुद्ध गणी शकाय नहीं. ६१. केटलाक जूना विचारने वळगी रहेनारा गृहस्थो तरफथी एम कहेवामा आवे छे के आठ वर्ष पछी दीक्षा आपी शकाय एम जैन दीक्षा लेवानी उमरमां फेर शास्त्रोमा ठरावेलुं छे तने बदले १६ (के १८) वर्षनी फार करवायी धर्मना मूळ सिद्धांतोमां फेरफार थतो नथी. पछोज दीक्षा आपी शकाय एम ठराववाथी धर्मशास्त्रमा ठरेला सिद्धांतोमा फेरफार थाय अने तेथी तेम कर, ए धर्म विरुद्ध थाय. पण आ दलील बरोबर लागती नथी. कमीमां कमी केटली उमरे दीक्षा आपी शकाय ए विषे प्राचीन काळमां जे ठरावेलुं हतुं तेनी मात्र यत्तामा फेरफार कर Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com

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