Book Title: Sannyas Diksha Pratibandhak Nibandhna Musadda Uper Vichar Karva Nimayeli Samitinu Nivedan
Author(s): Sanyas Diksha Pratibandhak Samiti
Publisher: Sanyas Diksha Pratibandhak Samiti

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Page 70
________________ ४. त्यागनी दीक्षा एक धार्मिक संस्कार गणाय छे; तेनी वच्चे श्रीमंत सरकारे पडवानो आ मुसद्दानो हेतु नथी; परंतु जो कोई सगीरने मुसद्दानी कलम ४. " तेवी दीक्षा आपवामां आवे तो ते तेनी समजण शिवाय अथवा रजामंदी शिवाय छे एम गणवं जोईए अने तेयी तेवी दीक्षाने अंगे कायदाने लईने तेना हितविरुद्ध जे जे परिणाम आवे ते तेने भोगवां न पडे एवा इरादायी सगीरने दीक्षा आपत्रामां आवे तो ते कायदानी दृष्टिए सर्व प्रकारे निरर्थक छे एम गणवा कलम ४ मां ठराव्युं छे, एटले के ते कलममा जण्याच्या प्रमाणे तेवा कोई सगीरना कायदेसर हक्क के जवाबदारीओ होय तेने तेवी दीक्षाथी बाध आवशे नहीं एवं समजवा ठराव्यु छे. ५. आ उपरांत एवा कोई सगीरने जो कोईपण माणस दीक्षा आपशे अगर आपवामा मददगारी करशे तेने कलम ५ थी शिक्षा पात्र कलम ५. ठराव्यो हे. ६. आटला धोरणो हाल पूरता छ एम जणायुं छे; सगीर न होय एवा माणसने __कोई आवी दीक्षा आपे तो तेने माटे प्रतिबंध मूक्यो सगीर ने होय एवा माणसने । आवी दीक्षा अपे तो प्रतिबंध मुक्यो नथी. ७. आशा छे के जनसमाजना हित माटे श्रीमंत सरकार तरफथी थएला वखतो वखतना कायदाओनी माफक आ कायदानो मुसद्दो पण आशा. प्रजा राजीखुशीथी स्त्रीकारशे अने जे अनर्थो थता होय ते अटकाववामां सहायभूत थशे. तारीख २३ माहे जुलाई सन १९३१. म. से. दवे. विष्णु कृष्णराव धुरंधर, न्यायमंत्री. Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com

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