Book Title: Rajasthan ke Jain Shastra Bhandaronki Granth Soochi Part 1
Author(s): Kasturchand Kasliwal
Publisher: Ramchandra Khinduka

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Page 208
________________ * श्री महावीर शास्त्र भंडार के अन्य * लिपिका ने अन्त में विस्तृत प्रशस्ति दे रखी है। अन्य पूर्ण है। प्राचार्य श्री जयकोक्ति ने उक्त प्रन्थ की प्रतिलिपि बनवायी। १८३ महापुराण भाषा । ___ भाषाकर्ता अज्ञात ! भाषा हिन्दी ( गद्य )। पत्र संख्या ४२५, साइज १२॥५॥ इश्च । लिपि संयन् १८०३. कोटा निवासी श्री गूजरमल निगोत्या ने उक्त (राण की प्रतिलिपि करवायी। १८४ महीपाल चरित्र। . ___ रचचिता महाकवि श्री चारित्र भूषण मुनि । पा संस्कृत। पत्र संख्या ३५. साइज १०x४ इन्न । सम्पूर्ण पद्य संख्या ६४५. प्रति शुद्ध तथा सुन्दर है। प्रशस्ति है। प्रति नं० २. पत्र संख्या ३८. साइज ११४शा ५श्च । १८५ महीपालचरित मापा। . . __ भाषाकार श्री नथमक। भाषा हिन्दी गटा। पत्र संख्या ३८. साज १३४५। इञ्च । प्रत्येक पृष्ठ पर १५ पंक्तियां तथा पत्येक पृष्ठ पर ४२-४४ अक्षर। प्रन्य पूर्ण है। भाषाकार .रा लिखित प्रशस्ति है। रचना संवत् १६१८. लिपि संवत् १९८२. लिखावट सुन्दर है। १८६ महीपाल चरित्र भाषा । भाषाकर्ता अज्ञात | भाषा हिन्दी गद्य । पत्र संख्या ५३. साइज १२४८ इञ्च । प्रत्येक पृष्ठ पर ६३ पक्तियां तथा प्रति पंक्ति में ३५-३८ अक्षर। महाकवि चारित्र भूपण द्वारा रचित संस्कृत काय का हिन्दी अनुवाद है । हिन्दी प्राचीन होने पर भी अच्छी है। प्रति बिलकुल नवीन है। १८७ मिथ्यात्व निषेधन । रचयिता महाकवि बनारसीदास । भाषा हिन्दी गद्य | पृष्ठ संख्या २८, साइज ११४६ इञ्च । मिथ्यात्व का अनेक उदाहरणों द्वारा खंइन किया गया है। प्रारम्भ के - पृष्ठों का एक तरफ का भाग फटा हुआ है। १८८ मूलाचार। . रचयिता श्री वहि केलाचार्य। भाषा प्राकृत । पत्र संख्या १५२. साइज ११४शा इश्च । प्रति पूर्व है। लिखावट अच्छी है।

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