Book Title: Nandanvan Kalpataru 2017 06 SrNo 38
Author(s): Kirtitrai
Publisher: Jain Granth Prakashan Samiti

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Page 12
________________ श्रीमहावीरस्तुतिः जिनेषु दिव्यप्रभया स्वरोचिषा विरोचमानो जिनधर्मतत्त्ववित् । जिनेन्द्रधर्मं तनितुं प्रजातवांस्तस्मै महावीर ! नमो नमोऽस्तु ते ॥ १ ॥ वसन्तकाले गत उत्तरायणे रवौ हि चैत्रे शुभशुक्लपक्ष । त्रयोदशीरात्रिपरार्द्धभागके धृतावताराय च वीर ! ते नमः ॥२॥ महापवित्रे सुकुले प्रसिद्धे जातो जनन्या जनकस्य पुण्यैः । यस्यावतारे चकिता हि देवा: सदा महावीर ! नमोऽस्तु तस्मै ||३|| जन्मोत्सवे विश्वमिदं प्रसन्नं वायुर्दिगीशा भुवि पादपाश्च । पतत्रिणश्चाऽपि समस्तजीवा मुदं गता यस्य नमामि वीरम् ॥४॥ स्वजन्मकालेऽपि सहस्रभानोः समानकान्त्या च दिगन्धकारः । विनाशमाप्तो बहुदिव्यरूपं सौन्दर्यसिन्धुं च नमामि वीरम् ॥५॥ ३

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