Book Title: Nandanvan Kalpataru 2017 06 SrNo 38
Author(s): Kirtitrai
Publisher: Jain Granth Prakashan Samiti
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जिनेश्वरम्प्रति प्रतिदिनं रात्रौ तालध्वजस्थो हस्तगिरिस्थो रेवताचलस्थश्चेति सर्वे तीर्थाधिष्ठायका देवा दिव्यशक्त्याऽऽगत्य नत्वा सहोपविश्य परमात्मभक्तानां जनानां कथं श्रेयो भवेदिति विचारयामासुः । एको जिनेन्द्रस्य कृतः प्रणामो
दशाश्वमेधावभृथेन तुल्यः । दशाश्वमेधी पुनरेति जन्म
जिनेन्द्र-नामी न पुनर्भवाय । १ ।
॥ इति श्रीसिद्धाचलेश्वरस्तवना ॥
(अज्ञातकर्तृका)

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