Book Title: Nandanvan Kalpataru 2017 06 SrNo 38
Author(s): Kirtitrai
Publisher: Jain Granth Prakashan Samiti
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महोपाध्यायश्रीमद्यशोविजयगुणस्तुत्यष्टकम् ।
-आ.विजयहेमचन्द्रसूरिः
(वैतालीयवृत्तम्) यशसा खलु विश्रुतात्मने, जिनधर्मैकनिबद्धचेतसे । विजयाय यशोऽभिधाय ते, सदुपाध्यायवराय नौम्यहम् ॥१॥
जितवादिगजेन्द्रसंहतिं, परितः प्रौढविभाविभासितम् । जगदेकविपश्चितं न को,
भुवि जानाति सुतर्कपण्डितम् ।।२।। मुनिना निजजन्मनाऽमुना, महनीयेन 'कनोडु'नामकम् । पुरमत्यधिकं पवित्रितं, कुरुते किन्नहि सत्समागमः ? ॥३॥
स्पृहणीयगुणं नयाभिधं, विजयान्तं गुरुमाश्रितः सुधीः । तदुपासनया प्रपेदिवान्, विमलज्ञानविभासिसत्क्रियाम् ॥४॥

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