Book Title: Nandanvan Kalpataru 2017 06 SrNo 38
Author(s): Kirtitrai
Publisher: Jain Granth Prakashan Samiti
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नगरीं श्रुतसिद्धिसाधिकामथ काशीमधिगत्य मञ्जुलाम् । चिरमेकमनाः सरस्वती
मुपतस्थे तमसो निवृत्तये ॥५॥ समशास्त्रविमर्शकोविदः सदनेकान्तमताब्धिपारगः । हितकारिवरोपदेशकः, किमु धन्यो न मुनीश्वरोऽवनौ ? ॥६॥
रचिता विविधा गुणोज्ज्वलाः कृतयस्तर्कवितर्कमण्डिताः ।। विदुषा महता सुदुर्ग्रहा,
विबुधा याभिरहो चमत्कृताः ।।७।। जिनदर्शनतत्त्वदीपकः, प्रशमादीद्धगुणौघसंवृतः । भविकव्रजबोधदायको, गणिराजो नितरां विराजताम् ॥८॥
इति वाचकपुङ्गवो मया, महितस्तद्गुणपुष्पमालया । गुरुदेवपदम्बुजालिना, कलधौतान्वितसोमसाधुना ॥९॥

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