Book Title: Nandanvan Kalpataru 2004 00 SrNo 12 Author(s): Kirtitrai Publisher: Jain Granth Prakashan Samiti View full book textPage 6
________________ श्रीशिवनारायणः शास्त्री 2152/13 हुडा, भिवानी-127021 (हरि०) वाचकानां प्रतिभावः विजयशीलचन्द्रसूरिवरस्य, चरणशरणमुपगत एषोऽहम् । वन्दे शिवनारायणनामा, नन्दनवनकल्पतरुमथ वाप्य ॥ विक्रमसंवत्षष्टितमस्य, शाखामेतां कल्पितशोभाम् । सुरवरवाणीकलशुभगुञ्जनमधुरमनोरमश्रुतिसुखसुलभाम् ॥ रुचिरमनोहरनीतिवचांसि, पूज्यतपोनिधिचरितशुभानि । कर्णरसायनसुरभितमानि, पठति मनो मे जीवनदानि ॥ नृत्यति हर्षितचित्तमयूरः, सुरवरवाणीनभसि विहारी । रचनामेघविलोकनमत्तः, प्रणमति शिवनारायणशास्त्री ॥ - शिवनारायणः शास्त्री । ALDINES H Jain Education International -5 For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.orgPage Navigation
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