Book Title: Kulak Sangraha
Author(s): 
Publisher: Sushilsuri Jain Gyanmandir

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Page 270
________________ ३२ अगवरी पधारते हुए श्रीसंघ ने बेन्ड युक्त स्वागत किया और मंगल प्रवचन के पश्चात् प्रभावना की । वहां से उमेदपुर पधारते हुए श्री जैन बालाश्रम के विद्यार्थियों ने बेन्ड युक्त श्रीसंघ के उत्साह के साथ प. पू. आ. म. आदि मुनि समुदाय का स्वागत किया । प्रवचन के प्रश्चात् गुडाबालोतान् संघ की ओर से श्री भीडभंजन पार्श्वनाथ जिनमन्दिर में श्री पार्श्वनाथ प्रभु की पंचकल्याण पूजा पढाई गई और स्वामीवात्सल्य भी हुआ । परमपूज्य आ. म. सा. के उपदेश से उमेदपुर में बन रही जैन धर्मशाला में अगवरी निवासी शा. ताराचन्दजी के सुपुत्र श्री हिम्मतमलजी ने अपनी ओर से एक कमरा बनाने का जाहेर किया । प. पू. आ. म. सा. के साथ इस प्रसंग पर तपस्वी पू. पंन्यासश्रीभुवन विजयजी म. सा. का सुभग संमिलन हुआ । (२) मागशर ( कार्त्तिक) वद ७ रविवार दिनांक ११-११-७६ को प. पू. आ. म. सा. आदि सुबह उमेदपुर से विहार कर तखतगढ में पधारते हुए श्रीसंघ ने बेन्ड युक्त स्वागत किया । व्याख्यान के पश्चात् प्रभावना की । (३) मागशर ( कार्त्तिक) वद ८ सोमवार दिनांक १२-११-७६ को सुबह तखतगढ से विहार कर कोसीलाव

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