Book Title: Gyan Swaroday
Author(s): Kabir Sadguru
Publisher: Kabir Dharmvardhak Karyalay

View full book text
Previous | Next

Page 11
________________ दिए गये हैं, वे सब के सब बहुमुल्य और जनोपयोगी हैं । इन सब ग्रंथोंमें लौकिक, पारलौकिक और आध्यात्मिक सुख-समृद्धि के हेतुभूत प्रश्नों की खूब विशद विचारणा की गई है । जो हरएक व्यक्ति के लिए अति उपयोगी और हितसाधक है। ऐसे लोकोपयोगी मुंदर, सुखप्रद ग्रंथरत्नों का संकलन और प्रकाशन कर पू० म० श्री बालकदासजी साहबने संत-साहित्य की रक्षा-प्रचार की दृष्टिसे और जिज्ञासु जनों की हित कामनाकी दृष्टि से जो पवित्र सेवा और पूर्ति की है, उसके लिए सचमुच ही वे सर्वथा प्रशंसा और आभार-अभिनंदन के अधिकारी हैं। और बाह्यान्तर सुंदरता, छपाई, सफाई, आकार-प्रकारको सुखद मनोरम्यता और नेत्रप्रियता प्रदानकर्ता पं० श्रीमोतीदासजी साहेब भी हमारे अभिनंदन और प्रशंसा के पात्र हैं। ___ दयासागर, सद्गुरु कबीर धर्मदास साहेब, उन्हें ऐसे निर्मल सुखप्रद कार्योंका विशेष वितान करने की सर्वतोमुखी क्षमता प्रदान करें, यही नम्र मंगल कामना और प्रार्थना है। जो लोग अपनी किसी भी प्रकार की कामनाओं की पति के लिये यत्रतत्र भटकते हैं और दुःख उठाते हैं। और अन्त में गहरी निराशा के गढ्ढे में गिर कर विनाशको प्राप्त होते है; उन सबसे नम्र प्रार्थना है कि, इस सर्वोत्तम प्रकाशन का अमोघ लाभ उठाकर लाभान्वित होनेका सदा प्रयत्न करें । इति शम् ! ज्ञानाश्रम-विश्वामित्री, मत स्वामी श्री बालकृष्णदासजी साहेब. ता. ६-६-४९. महत स्वामा ला बालकृष्णदासजा साहब. Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com

Loading...

Page Navigation
1 ... 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 32 33 34 35 36 37 38 39 40 41 42 43 44 45 46 47 48 49 50 51 52 53 54 55 56 57 58 59 60 61 62 63 64 65 66 67 68 69 70 71 72 73 74 75 76 77 78 79 80 81 82 83 84 85 86