Book Title: Gyan Swaroday
Author(s): Kabir Sadguru
Publisher: Kabir Dharmvardhak Karyalay

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Page 42
________________ [३१] पवन स्वरोदय । सोमवार बुध शुक्र दिन, और बृहस्पति पेख । चंद्रयोग में सुफल ये, मोतीदास विशेष ॥३२॥ परे बृहस्पति चंद्र सुर, तिथि चंदा परमान । सूरज स्वरमें शनि रवि, मंगल भोरहि भान ॥३३॥ शुक्ल पक्ष परिवां लगे, तिथि चारों परमान । फिर रवि चंदा फिर रवि, फिर रवि इंदू जान ॥३४॥ कृष्णपक्ष के आदि में, तीन दिना रवि लेख । पुनि चंदा पुनि रवि सही, पुनि चंदा रवि लेख ॥३५॥ सूरज दिन चंदा बहै, चंदा दिन रवि होय । ता दिन विन लागे कछु, हानि ताप दुख होय ॥३६॥ परिवाँ चंदा को लगे, सूरज पावे प्रात । हानि ताप मृत्यु करे, मत जानो कुशलात ॥३७॥ सूरज की परिवाँ जबे, चंद उदय जो होय । विन लगे तन मन दहे, शुभ कारज मति जोय ॥३८॥ ताते साधन कीजिये, ले गुरुसे उपदेश । तन मन आनंद सो रहे, छूटे विघ्न कलेश ॥३९॥ रुई गदेला मांझ की, बत्ती जबर करंद । दिनको सूरज बंद कर, रात चंद्र कर बंद ॥४०॥ गमन दाहिने स्वर करो, पूरब उत्तर देश । पश्चिम दक्षिण चंद्र स्वर, सुख संपत्ति फल बेस ॥४१॥ Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com

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