Book Title: Gyan Swaroday
Author(s): Kabir Sadguru
Publisher: Kabir Dharmvardhak Karyalay

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Page 17
________________ ज्ञान स्वरोदय। ऊंचे सनमुख बामही, चंद्र करै परकास । जो कोइ पूछे आय करि, तो पावे सुख वास ॥१८॥ दहिने स्वर के चलत ही, पूछ बाँयें अंग।। शुक्ल पक्ष नहिं वार है, तो निष्फल परसंग ॥१९॥ पूछ बाँयें आय के, बेठे दहिनी ओर । चंद चले सूरज नहीं, तिन कारज विधकोर ॥२०॥ जो कोइ पूछे आय के, बैठे दहिने हात । लगन वार अरु तिथि मिले, शुभ कारज है जात ॥२१॥ जो चंदा में स्वर चलै, बाँये पूछ काज । तिथि अक्षर अरु वार मिले, सफल काज है साज ॥२२॥ जो सूरज में स्वर चलै, कहै दाहिने आय । लगन वार अरु तिथि मिले, तो कारज है जाय ॥२३॥ सात पांच नौ तीन गये, पंद्रह और पचीस । कार्य वचन अक्षर गिने, भानु जोग को ईस ॥२४॥ चार आठ द्वादश गिनै, चौदा सोलह मीत । चंद जोग को मिलत है, कहैं कबीर जगजीत ॥२५॥ लग्न परीक्षा। करक मेष तूला मकर, चारों चढती राशि । सूरज को चारों मिले, चर कारज परकाश ॥२६॥ मीन मिथुन कन्या कही, और हु चौथी धंन । नष्ट काज को सुषमना, मुरली सुर रुनझुन ॥२७॥ Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com

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