Book Title: Gyan Swaroday
Author(s): Kabir Sadguru
Publisher: Kabir Dharmvardhak Karyalay

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Page 30
________________ ज्ञान स्वरोदय । बाँयें स्वर के चलत ही, जो कोइ पूछ बात । वाको बाँयों स्वर चलै, बेटी होय, कुसलात ॥१३७।। दोनों स्वर सुषमन चले. कहै गर्भ की आय । गर्भ गिरै माता दुखी, कष्ट होय मरि जाय ॥१३८॥ तत्व अकाशू चलत ही, जो कोइ पूछ बात । छाया है बाडै नहीं, पेट हि मांहि बिलात ॥१३९॥ जो कोइ पूछ आय के, याको गर्भ कि नांहि । दहिनो वाको स्वर चले, साधे श्वासा मांहि ॥१४०।। बंध हि और जो आय के, हित कर पूछे कोय । बंध हि और सगर्भ ये, यहते स्वर नहि होय ॥१४१।। चंद्र और जो आय के, तब पूछे जो कोय । चंद्र और तो गरभ है, बहता स्वर जो होय ॥१४२॥ अथ श्वासा परीक्षा । इंगला पिंगला सुषमना, नाडी कहिये तीन । सूरज चंद्र विचार के, रहै श्वास लौ लीन ॥१४३॥ जैसे कछुआ समिटि के, आप हि मांहि समाय । ऐसे ज्ञानी श्वास में, रहे सुरति लौ लाय ॥१४४॥ श्वासा आप विचार के, आयु जान नर लोय । बीत जाय श्वासा जबै, तबही मृत्युक होय ॥१४५।। इक्कीस हजार छः सौ चले, रात दिवस जो श्वास । बीसा सौ जीवै वरष, होय अपन पौ नास ॥१४६॥ Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com

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