Book Title: Aupapatikopanga Sutram
Author(s): Jinendrasuri,
Publisher: Harshpushpamrut Jain Granthmala
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औपपाति
॥१५०॥
झोणोदगा समाणा तण्हाए पारम्भमाणा पार २ उदगदातारमपस्समाणा अण्णमष्णं सद्दावेति सहावित्ता एवं वयासी-एवं खल देवाण
अम्बड प्पिया! अम्ह इमीसे अगामिआए जाव अडवीए कंचि देसंतरमणुपत्ताणं से उदय जाव झीणे त सेयं खलु देवाणुप्पिया! अम्ह इमोसे : अगामियाए जाव अडवीए उदगदातारस्स सव्वओ समंता मग्गणगवेसणं करित्तए तिकटु अण्णमण्णस्स अंतीए एअमटुं पडिसुणंति २त्ता तीसे अमामियाए जाव अडवीए उदगदातारस्स सव्वओ समंता मग्गणगवेसणं करेइ करिता उदगदातारमलभमाणा दोबंपि अण्णमण्णं सद्दावेन्ति सद्दावेत्ता एवं बयासी-इह णं देवाणुप्पिया! उदगदातारो णत्थि तं णो खलु कप्पइ अम्ह अदिण्णं गिहित्तए (अदिन्न भुजि तए अदिन्नं सातिज्जित्तए), तं मा ण अम्हे इयाणि आवइकालंपि अदिण्णं गिव्हामो भुजामो (अदिण्णं भुंजामो अदिन्नं सादिज्जामो) मा णं अम्हं तवलोवे भविस्सइ, त सेयं खलु अम्हं देवाणुप्पिया ! तिदंडयं कुंडियाओ य कंचणियाओ य करोडियाओ य भिसियाओ य छष्णालए य अंकसए य केसरीपाओ य पवित्तए य गणेत्तियाओ य छत्तए य वाहणाओ य पाउयाओ य धाउरत्ताओ य एगते एडित्ता गंग महाणई ओगाहित्ता वालुअसंथारए संथरित्ता संलेहणाझोसियाण भत्तपाणपडियाइक्खियाणं पाआव याणं कालं अणवकंखमाणाणं विहरित्तएत्तिकटु अण्णमण्णस्स अतिए एअमटुं पडिसुगंति, अण्णमण्णस्स अंतिए एअमट्ठ पडिसुणित्ता तिदंडए य जाब एगते एडेइ २ गंग महाणई ओगाहेति २त्ता वालुआसंथारए संथरति २ वालुयासंथारए संथरंति२ वालुयासंथारयं दुहिति २त्ता पुरत्थाभिमुहा संपलियंकनिसन्ना करयल जाव कट्ट एवं बयासी-णमोऽत्थ णं अरहंताणं जाव संपत्ताणं, नमोऽत्थु णं समणस्स भगवओ महावीरस्स जाव संपाविउकामस्स, नमो
||१५०॥ ऽत्यु णं अम्मडस्स परिव्वायगस्स अम्हं धम्मायरियस्स धम्मोवदेसगस्स, पुचि णं अम्हे अम्मडस्स परिव्वायगस्स अंतिए थूलगपाणाइवाए पञ्चक्खाए जावज्जीवाए मुसावाए अणिण्णादाणे पञ्चक्खाए जावज्जीवाए सव्वे मेहुणे पञ्चक्खाए जावज्जीवाए थूलए परिगहे पञ्चक्खाए जावज्जीवाए, इयाणि अम्हे समणस्स भगवओ महावीरस्स अंतिए सव्वं पाणाइवायं पच्चक्खामो जावज्जीवाए एवं जाव सव्वं परिग्गह पञ्चक्खामो जावज्जीवाए, सव्वं कोहं माणं मायं लोहं पेज दोस कलहं अभक्खाणं पेसुण्णं परपरिवायं अरइरई मायामोस मिच्छादसण

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