Book Title: Agam Sudha Sindhu Part 13
Author(s): Jinendravijay Gani
Publisher: Harshpushpamrut Jain Granthmala

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Page 121
________________ 11] [ श्रीमदागमसुधासिन्धुः // त्रयोदशमी विभागः चिरकालेण वि सव्वपाणिणं। गादा य विवाग कम्मुणो, समयं गोयम ! मा पमायए // 4 // पुढविकाय-मइगयो उक्कोसं जीवो उ संवसे / कालं संखाईयं, समयं गोयम ! मा पमायए॥ 5 // श्राउकायमइगयो, उक्कोसं जीवो उ संवसे। कालं संखाईयं, समयं गोयम ! मा पमायए // 6 // तेउकाय-मइगयो, उक्कोसं जीवो उ संवसे। कालं संखाईयं, समयं गोयम ! मा पमायए // 7 // वाउकायमइगयो, उक्कोसं जीवो उ संवसे / कालं संखाईयं, समयं गोयम! मा पमायए // 8 // वणस्सइकाय-मइगयो, उक्कोसं जीवो उसंवसे / कालमणन्त-दुरन्तयं, समयं गोयम ! मा पमायए॥१॥ बेइन्दियकाय-मइगयो, उक्कोसं जीवो उ संबसे। कालं संखिजसन्नियं, समयं गोयम ! मा पमायए // 10 // तेइन्दिकायमइगयो, उक्कोसं जीवो उ संवसे / कालं संखिजसन्नियं, समयं गोयम ! मा पमायए // 11 // चउरिन्दियकाय-मइगयो, उक्कोसं जीवो उ संवसे / कालं संखिज्जसन्नियं समयं गोयम ! मा पमायए // 12 // पंचिन्दियकाय-मइगयो, उक्कोसं जीवो उ संवसे / सत्तठ्ठ-भवगहणे, समयं गोयम ! मा पमायए // 13 // देवे नेरइए अइगयो, उक्कोसं जीवो उ संवसे / इसे कभवगहणे, समयं गोयम ! मा पमायए // 14 // एवं भवसंसारे संसरइ, सुहासुहेहिं कम्मेहिं / जीवो पमायबहुलो, समयं गोयम ! मा पमायए // 15 // लभ्रूणवि माणुसत्तणं, पारियतं णं पुणरवि दुल्लहं / बहवे दसुया मिलेक्खुया, समयं गोयम ! मा पमायए // 16 // लक्षुण वि पारियत्तणं, अहीणपंचिन्दियया हु दुलहा / विगलिन्दियया हु दीसइ, समयं गोयम ! मा पयामए // 17 // अहीणपंचिन्दियत्तं पि से लहे उत्तमधम्मसुई हु दुल्लहा। मिच्छत्तनिसेवए जणे, समय गोयम ! मा पमायए॥ 18 // लण वि उत्तमं सुई, सद्दहणा पुणरावि दुल्लहा। मिच्छित्तनिसेवए जो, समयं गोयम ! मा पमायए // 11 // धम्म पि हु सद्दहन्तया, दुल्लहया कारण

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