Book Title: Agam 33 Prakirnak 10 Viratthao Sutra
Author(s): Punyavijay, Sagarmal Jain
Publisher: Agam Ahimsa Samta Evam Prakrit Samsthan

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Page 14
________________ भूमिका पइण्णपसमाई भाग २ :--.. ... इसमें निम्न बारह प्रकीर्णक एवं कुलक ग्रन्थ हैं--- १ आराधनापनाका (पानीनाचार्य विरचित) २ आराधारायलाका (श्री वीरभद्राचार्य विरचित) ३. आराधनासार (पर्यन्त आराधना) ४. आराधना पत्रक श्री उद्योलनसूरी विरचित कुवलयमालाकहा के अन्तर्गत) ५. आराधनाप्रकरण (श्री अभयदेवसूरी प्रणीत) ६. आराधना (जिनेश्वर श्रावका एवं सुलसा श्राविका ७. आराधना नन्दनमुनि द्वारा आराधित आराधना) 4. आराधना कुलक ९-१० मिथ्यादुष्कृतफुलक भाग १.२ ११ आलोयणाकुलक १२. अल्पविशुद्धि कुक इस प्रकार इसमें २७ प्रकीर्णक और ५ कुलक प्रकाशित हैं। इनमें चतुकारण नामक २ प्रकीर्णक, आतुरप्रत्याभ्यान नाम से ३ प्रकीर्णक और आराधना के नाम से ७ प्रकीर्णक एवं एक कुलक है। यदि आराधना, चतुःशरण और आतुरप्रत्याख्यान को एक-एक माना जाय तो कूल १८ प्रकीर्णक होने हैं। इन २ भागों में अप्रकाशित-अंगविज्जा, अजीव कप्प, मिद्धपाहा एवं जिनविभत्ति ये चार जोड़ने पर प्रकीर्णकों की कुल संख्या २२ होती है। इन प्रकीर्णकों के नामों में से नन्दी एवं पाक्षिक सूत्र से उत्कालिक सत्रों के वर्ग में (1) देवेन्द्रस्तव (२) तंदूलवैचारिक (३) चन्द्रवेध्यक (४) गणिविद्या (५) मरण विभक्ति (६) मरणसमाधि (७) महाप्रत्याख्यान ये सात नाम पाये जाते हैं एवं कालिक सूत्रों के वर्ग में (१) ऋषिभाषित एवं (२) द्वीपसामरप्रज्ञप्ति ये दो नाम पाये जाते हैं । १. नन्दीसूत्र-पुनि मधुकर, पन्य ८०.८१

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