Book Title: Sambodhi 2013 Vol 36
Author(s): Jitendra B Shah
Publisher: L D Indology Ahmedabad

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Page 15
________________ Vol. XXXVI, 2013 On the Antiquity and Original Parts of the “Puņdarīka Adhyayana” 7 तते नं से पुरिसे तं पुरिसं एवं वदासी-अहो नं इमे पुरिसे अखेतन्ने अकुसले अपंडिते अवियत्ते अमेधावी बाले नो मग्गत्थे नो मग्गविदू नो मग्गस्स गतिपरिक्कमन्नू जं नं एस पुरिसे खेतन्ने कुसले पंडिते वियत्ते मेधावी अबाले मग्गत्थे मग्गविदू गतिपरिक्कमन्नू अहमेत पउमवरपुंडरीगं उन्निक्खेस्सामि नो च खलु एतं पउमवरपुंडरीगं एवं उन्निक्खेत्तव्वं जथा नं एस पुरिसे मन्ने । अहमंसि पुरिसे खेतन्ने कुसले पंडिते मेधावी अबाले मग्गत्थे मग्गविदू मग्गस्स गतिपरिक्कमन्नू अहमेतं पउमवरपुंडरीगं उन्निक्खिस्सामि त्ति कट्ट इति वच्चा से पुरिसे अभिक्कमे तं पुक्खरणिं जाव जावं अभिक्कमे ताव तावं च नं महंते उदगे महंते सेते पहीने तीरं अप्पत्ते पउमवरपुंडरीगं नो हव्वाते नो पाराते अंतरा सेतंसि विसने दोच्चे पुरिसजाते । अथापरे तच्चे पुरिसजाते । अह पुरिसे पच्चत्थिमातो दिसातो आगम्म तं पुक्खरणिं तीसे पुक्खरणीए तीरे ठिच्चा पासति तं महं एगं पउमवरपुंडरीगं अनुपुव्वट्ठितं ऊसितं रुतिलं वनमंत गंधमंतं रसमंतं फासमंतं पासादीते दरिसनिते अभिरूवे पडिरूवे । ते तत्थ दोन्नि पुरिसजाते पासति पहीणे तीरं अप्पत्ते पउमवरपुंडरीगं नो हव्वाते पारात्ते सेतंसि विसन्ने । . तते नं से पुरिसे एवं वदासी-अहो नं इमे पुरिसा अखेतन्ना अकुसला अपंडिता अवियत्ता अभेघावी बाला नो मग्गत्था नो मग्गविदू नो मग्गस्स गतिपरिक्कमन्नू जं नं एते पुरिसा एवं मन्ने अम्हे तं पउमवरपुंडरीगं उनिक्खेस्सामो नो च खलु एतं पउमवरपुंडरीगं एवं उन्निक्खेत्तव्वं जथा नं एते पुरिसा मन्ने । __ अहमंसि पुरिसे खेतन्ने कुसले पंडिते वियत्ते मेधावी अबाले मग्गत्थे मग्गविदू मग्गस्स गतिपरिक्कमन्नू अहमेतं पउभवरपुंडरीगं उन्निक्खेस्सामि इति वच्चा से पुरिसे त पोक्खरणिं जाव जावं 'च नं अभिक्कमे ताव तावं च नं उदगे महंते सेते पहीने तीरं अपत्ते पउमवरपुंडरीगं नो हव्वाते नो पाराते अंतरा सेतंसि विसन्ने तच्चे पुरिसज्जाते । अथापरे चतुत्थे पुरिसज्जाते । अह पुरिसे उत्तरातो दिसातो आगम्म तं पुक्खरणिं तीसे पुक्खरणीए तीरे ठिच्चा पासति [ महं] एगं पउमवरपुंडरीगं अनुपुव्वट्ठितं ऊसितं रुतिलं वन्नमंतं गंधमंतं रसमंतं फासमंतं पासादीतं दरिसनितं अभिरूवं पडिरूवं । त च एत्थ एगं पुरिसजातं पासति पहीणं तीर अपत्तं पउमवरपुंडरीगं नो हव्वाते नो पाराते अन्तरा पोक्खरणीए सेतंसि विसन्नं । - तते नं से पुरिसे एवं वदासी-अहो नं इमे पुरिसा अखेतन्ना अकुसला अपंडिता अवियत्ता अमेधावी बाले नो मग्गत्था नो मग्गविदू नो मग्गस्स गतिपरिक्कमन्नू जन्नं एते पुरिसा एवं मन्ने अम्हे तं पउमवरपुंडरीगं उन्निक्खिस्सामो । नो खलु एतं पउमवरपुंडरीगं एवं उन्निक्खेत्तव्वं जथा नं एते पुरिसा मन्ने । अहमंसि पुरिसे खेतन्ने कुसले पंडिते वियत्ते मेधावी अबाले मग्गत्थे मग्गविदू मग्गस्स Jain Education International For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org

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