Book Title: Padma Vardhaman Sanskrit Dhatu Shabda Rupavali Part 01
Author(s): Rajpadmasagar, Kalyanpadmasagar
Publisher: Padmasagarsuri Charitable Trust

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Page 168
________________ -: कदन्तावली: M कृदन्त भूत कृदन्त कदन्न संबंधक वर्तमान कर्तरि कृदन्त णत.प. SAKSE 42 Ince Elipse नक्रम. एक वचन blue 216 Inic ON 11521 क्रीड् 1 पर | क्रीडितुम् | क्रीडित्वा क्रीडत् क्रीड्यमान क्रीड्यमान | क्रीडितवत् | क्रीडित | क्रीडित | क्रीडितव्य, क्रीडनीय क्रीड्यते रम रमवा माटे रमीने रमतो क्रीडा करातो क्रीडा कराती क्रीडा करेली क्रीडा | क्रीडा | रमवा योग्य क्रीडा क्रीडा करतो करायेलो | करायेलो कराय छे जप 1 |पर | जपितुम जपित्वा जपत् जप्यमान जप्यमान |जपितवत् |जपित जपित |जपितव्य, जपनीय जप्यते जपवा माटे जपीने जपतो, जाप करातो | जाप करातो | जाप करेलो| जाप जाप जपवा योग्य जपाय छे जाप करतो जपातो करायेलो करायेलो / 19. | जिम् 1 |पर | जेमितुम जेमित्वा जेमत् जिम्यमान | जिम्यमान जेमितवत् जेमित जेमित जेमितव्य,जेमनीय,जिम्य |जिम्यते जमवू / / जमवा माटे जमीने जमतो जमातो जमातो जमेलो खवायेलो |खवायेलो | जमवा योग्य खवाय छे 20. | निन्द् 1 |पर निन्दितुम् |निन्दित्वा निन्दत् निन्द्यमान | निन्द्यमान निन्दितवत् | निन्दित निन्दित | निन्दितव्य,निन्दनीय,निन्द्य निन्द्यते निन्दा निन्दा निन्दा निन्दा निन्दा | निन्दा निन्दवा योग्य करवो करवा माटे करीने करतो करातो करातो करेलो करायेलो करायेलो कराय छे 21. वृष 1 | पर वर्षितुम् वर्षित्वा,वृष्ट्वा वर्षत् वृष्यमाण वृष्यमाण वृष्टवत् वृष्ट वृष्ट वर्षितव्य,वर्षणीय,वृष्य वृष्यते / वरसवु / |वरसवा माटेवरसीने वरसतो वरसातो | वरसातो - वरसेलो | वरसायेलो वरसायेलो | वरसवा योग्य वरसाय छे 22. शुच् 1 पर शोचितुम् शोचित्वा शोचत् शुच्यमान शुच्यमान शोचितवत् शोचितशुचिताशोचित,शुचित शोचितव्य,शोचनीय,शोच्य शुच्यते शोक शोक करीने शोक करतो शोक करातो शोक करातो शोक करेलो शोक शोक शोक करवो जोइए शोक निन्दा निन्दा शोक

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