Book Title: Anusandhan 2005 06 SrNo 32
Author(s): Shilchandrasuri
Publisher: Kalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad
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अनुसन्धान ३२
॥६६॥
अंगें अड्या ते भचरड्या उरें मुह मरड्या केइ माहामुरे ॥६५।। कुंहणी गदा के पाटु लापोट ठांमे राख्या केई मारी थापोट हाथे पगे ने मस्तक हीई आपें छेदीने उडाडी दीइं चक्रं चुर्या केई चुसीनें लीधा पडता लोहीइ उपाडी पीधा हजारगमे केई कीधा हजंम लाखगमें तो राल्या उजम ॥६७॥ चरणे झाली ते नाख्या केइ चोली केइ गणणाव्या गोफण गोली ढाल वडें केइ धरणीइं ढाला गर्व घणाना गेडीइ गाल्या वेंरी घणा तो वा वलुर्या चापजोरे केई रणमांहि चुर्या कुबधि केतांइक कुहाडे कुट्या चुपट सांडसे घणा तो चुंट्या ॥६९।। केई हुता जे जूधना कुसली मुदगरें मारी लीधां ते मसली मोह पमाडि नांख्या केइ मरदी गगने उडाडी तेहनी गरदी ॥७०।। संखनादें केई लीधा तीहां सोसी खेरु कर्या केइ बरछीइं पोसी तोमर हले केइ घुघरें तरजा शत्रु चेंतें अमे पुरष कां सरजा ? ||७१।।
॥६८॥
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